WOMEN’S DAY- होंसलो की उड़ान

महाकवि मैथिलीशरण गुप्त की कालजयी रचना,’अबला जीवन तेरी यही कहानी,आँचल में दूध आँखो में पानी’ जैसी मानसिकता को ठोकर मारकर आज भारतीय महिलाएँ कोसो आगे निकल चुकी है। पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति सम्मान,सराहना, और प्यार प्रकट करने के लिए प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं द्वारा अर्जित आर्थिक,राजनैतिक और सामाजिक उपलब्धीयो का गुणगान किया जाता है। सन 2020 के महिला दिवस की थीम,महिलाओं को लेंगिक समानता व पुरुषों के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

भारत जैसे देश में जहाँ महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार,दहेज,कन्या भ्रूण हत्या,कार्य स्थल पर महिलाओं का शोषण व पारिवारिक हिंसा सर चढ़ कर बोल रही है, वहाँ महिलाओं का इतना विकास व आत्मविश्वास अविस्मरणीय है। जब जब समाज ने नारी शक्ति को समान अवसर उपलब्ध कराए है,महिलाओं ने देश व समाज की बेहतरी के लिए नए आयाम स्थापित किए है। आज महिलाएँ विज्ञान,शिक्षा,प्रोधोगिकी,स्वास्थ्य, बिज़्नेस, मीडिया व राजनीति में असाधारण योगदान के लिए जानी जाती है।

एक माँ,बेटी,बहन,पत्नी, व दोस्त के रूप में नारी ने अपनी उपयोगिता हमेशा भरपूर तरीक़े से निभाई है। घर व ऑफ़िस में अपनी इस दोहरी भूमिका को महिलाओं ने बख़ूबी निर्वाह किया है।एक कवि ने कहा है कि नारी का अर्थ है देवदूत, जो एक हाथ से झूले को हिलाता है और दूसरे हाथ से धरती को । वास्तव में नारी ज़ाती त्याग,करुणा,और दया की मूर्ति होती है।हमें इनकी इसी प्रतिभा का इस्तेमाल ग़रीबी,बीमारी के निवारण व शिक्षा के प्रचार व प्रसार में करना चाहिए ताकि समाज को आगे ले जाने में इनकी अहम भूमिका हो,और इनका नाम मानव जाति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाए। धन्यवाद व जय हिंद ।

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