WHO I AM – कौन हूँ मैं

WHO I AM – कौन हूँ मैं

ख़ुद के बारे में जानने की इच्छा किसमें नहीं होती है लेकिन हम वक़्त,हालात व दूसरों से डरकर ख़ुद के बारे में जानना ही नहीं चाहते हैं कि मैं कौन हूँ, मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है, मेरे जीने का मक़सद क्या है।अपने असली स्वरूप को पहचाने बिना हम बिना मतलब के बस ज़िये जा रहे हैं।आज तक हम अपनी स्वतंत्र पहचान तक नहीं बना पायें हैं।हम दूसरों के फ़ैसलों पर बस हाँ में हाँ मिलाते जा रहे हैं लेकिन हम ख़ुद से कभी कोई प्रश्न पूछने का साहस नहीं उठा पा रहे हैं।जो ख़ुद से प्रश्न नहीं पूछता है उसके लिये ज्ञान के द्वार हमेशा के लिये बन्द हो जाते हैं।जब आप अपनी अंदरूनी शक्ति को एकत्र कर पूरे वेग से अपने से पूछते हैं तो निस्सन्देह उत्तर की प्राप्ति होती है और यह उत्तर जीवन की सम्पूर्ण दशा व दिशा बदल कर रख देता है।

ख़ुद को पहचानिये

ख़ुद को जानने का सबसे अच्छा तरीक़ा स्वयं से प्रश्न पूछना है कि मैंने ख़ुद को बेहतर बनाने की कभी कोशिश की है या मैं उसी घिसी पिटी लकीर पर चलकर ही आगे बढ़ रहा हूँ।मैंने कभी अपनी ख़ूबियों व नाकामियों पर शान्त मन से चर्चा की है या मैं भी उसी ढर्रे पर चलना सीख गया हूँ।मैंने जीवन में अपने लक्ष्यों के बारे में कभी विस्तार से सोचा है या मैं भी उसी भीड़ का हिस्सा बनकर उसी में खो गया हूँ।स्पष्ट है कि मैंने जीवन में नई चीज़ों को सीखना व समझना बन्द कर दिया है।मैंने जीवन में कभी बदलाव लाने का प्रयास ही नहीं किया है।मैं अपने आप में मगन व ख़ुश हूँ लेकिन जब कोई मेरा परिचय पूछता है तो मैं अक्सर घबरा जाता हूँ और अपने आपको परिभाषित करने से डरने लगता हूँ।

जीवन में मेरे लक्ष्य क्या हैं ? —

ईश्वर द्वारा बनाये गये सभी जीवों में इन्सान श्रेष्ठ जीव है।वह न केवल अपना भला बुरा सोच सकता है बल्कि दूसरों के कल्याण के लिये बढ़ चढ़ कर योगदान दे सकता है।ईश्वर की इसी गहरी सोच ने मनुष्य का निर्माण किया था और इन्सान ख़ुद के ही बनाये हुए जीवन चक्र में उलझकर रह गया है।यह वह इन्सान नहीं जिसे भगवान ने दूसरों का जीवन सुधारने के लिये बड़े ही लाड़ प्यार से तराशा था।इन्सान श्रेष्ठता की हद तक पहुँचने की जल्दी में निकृष्टता की सारी सीमायें लाघंता जा रहा है और लालच की दलदल में फँसता चला जा रहा है।हमें इसी बात पर ही सोचना विचारना है कि हमारा जीवन कैसा होना चाहिये और हमारे जीवन का मक़सद क्या होना चाहिये।हमें अपने उद्देश्यों व लक्ष्यों के बारे में भली भाँति ज्ञान होना ज़रूरी है और हमें जीवन के अपने लक्ष्यों को फिर से परिभाषित करने की ज़रूरत है।

अपने जीवन को सार्थक करने का समय गया है

आप धरती पर ईश्वर के अंश के रूप में उतारे गये हैं।किसी ख़ास दायित्व या मक़सद के लिये ही आपका जन्म हुआ है।अपने आप को साधारण या आम नागरिक समझने की भूल न करें।अगर आप चाहें तो दुनिया बदलने की शुरुआत कर सकते हैं।किसी भी बड़े काम को अंजाम तक पहुँचाने के लिये जिस आग़ाज़ की आवश्यकता होती है,आप उसी आग़ाज़ का प्रतिबिम्ब है।अपनी पहचान बनाने का वक़्त आ गया है।अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर आगे बढ़ना ही ज़िन्दगी है।अपने मन के डर को मार कर ही आप आगे बढ़ सकते हैं और अपने जीवन को सार्थक कर सकते हैं।तभी आपका जीवन ख़ूबसूरत व असीम सम्भावनाओं से भरा होगा।बस एक क़दम आपके जीवन की दशा व दिशा दोनों को बदल कर रख देगा। धन्यवाद व जय हिन्द

This Post Has 3 Comments

  1. PERMILA RANI

    अपनी क्षमताओं को पहचान कर सर्वहिताय जीवन ही सुंदर और सार्थक जीवन है। श्रेयस्कर विचार है।

    1. PERMILA RANI

      अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचान कर सर्वहिताय जीवन ही सुंदर और सार्थक जीवन है। श्रेष्ठ विचार है।

    2. Ravi Kalra

      अपनी सुन्दर भावनाओं से अवगत कराने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद

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