VENTILATOR – वेंटिलेटर ( कोरोना से लड़ने वाला योद्धा )

आज पूरी दुनिया में कोरोना वायरस अपना शिकंजा कसता जा रहा है।विकासशील देशों को तो छोड़ें,विकसित देश भी इस जंग में अपने आपको असमर्थ महसूस कर रहे हैं।यह वायरस इतनी तेज़ी से फैला कि किसी भी देश को अपने आपको बचाने का मौक़ा नहीं मिला।उनके तमाम इंतज़ाम धरे के धरे रह गये।दुनिया भर में अगर मास्क,सेनिटाइज़र के बाद किसी चीज़ की डिमांड युद्धस्तर पर बढ़ी, वह वेंटिलेटर था।आख़िर ऐसा क्या है इस मशीन में,जानते हैं।

वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है जो साँस लेने में असमर्थ रोगियों के फ़ेफडों तक आक्सीजन पहुँचाने में मदद करती है।वेंटिलेटर पर ले जाने से पहले मरीज़ को ऐनस्थीसिया दिया जाता है।इस दौरान उसके शरीर में ऑक्सिजन देने के नली लगाई जाती है।साँस नली को वेंटिलेटर से जोड़ा जाता है।समय समय पर मेडिकल स्टाफ़ हवा का लेवल बढ़ाता रहता है।ताकि ऑक्सिजन फ़ेफड़ो तक पहुँच सके।आमतौर पर एक सामान्य इंसान एक मिनट में 15 बार साँस लेता है।लेकिन अगर वह 28 बार साँस ले रहा है तो उसे वेंटिलेटर की ज़रूरत है।व्यक्ति को गम्भीर स्थिति में 30 मिनट में वेंटिलेटर मिलना ज़रूरी है।

दुनिया भर में कोरोना की भयावह तस्वीर ने विकसित देशों के होश उड़ा दिए है। कोरोना के तेज़ी से बढ़ते मामलों ने वेंटिलेटर की माँग को आसमान पर पहुँचा दिया है।यूरोप के कई देशों ने वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनियो को भारी मात्रा में ऑर्डर दिया है।जर्मनी ने 10 हज़ार और इटली ने 5 हज़ार वेंटिलेटर का ऑर्डर दिया है।इसके अलावा ब्रिटेन व स्पेन की तरफ़ से हज़ारों वेंटिलेटर की डिमांड है।अकेले न्यूयार्क में ही अगले चन्द दिनों में लगभग 15 हज़ार वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ेगी। पूरी दुनिया में वेंटिलेटर का उत्पादन करने वाली 4-5 कंपनिया ही है। भारी डिमांड को वह पूरा करने में असमर्थ है।इसकी कमी की पूर्ति करने के लिये दुनिया की जानी मानी ऑटो व एंजिनियरिंग कंपनिया मैदान में उतर आयी हैं। आख़िर कोरोना को मात देने के लिये पूरी दुनिया का एकजुट होना ज़रुरी है।

भारत में भी स्थिति इतनी उत्साहवर्धक नहीं है। भारत की 130 करोड़ आबादी के लिए मात्र 30 हज़ार वेंटिलेटर ही उपलब्ध हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों ने सरकार के कान खड़े कर दिये हैं।पिछले कुछ दिनों से भारत सरकार ने युद्धस्तर पर कार्य किए हैं। सरकार ने नोएडा के एग़्वा हेल्थकेयर को तुरंत 10 हज़ार वेंटिलेटर बनाने को कहा है।अगले हफ़्ते से इसकी आपूर्ति शुरू हो जायेगी।रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन ( DRDO ) ने भारत की टॉप ऑटो कंपनीयो से हाथ मिलाया है। डीआरडीओ ने एक ऐसा वेंटिलेटर तैयार किया है जिसे 4 से 8 लोग एक साथ इस्तेमाल कर सकेंगे। डीआरडीओ ने यह टेक्नोलॉजी इन प्राइवेट कंपनीयो को सौंप दी है,जिससे यह कम्पनीया तुरंत वेंटिलेटर बना सके।आईआईटी कानपुर ने एक महीने के अंदर 1000 पोर्टबल वेंटिलेटर तैयार करने का ऐलान किया है भारत सरकार ने भारत इलेक्टरोनिक्स को भी 30 हज़ार वेंटिलेटर बनाने को कहा है। भारत की प्रमुख ऑटो कंपनिया अपने स्तर पर भी कार्य कर रही हैं।मारुति ने जहाँ वेंटिलेटर की तकनीक और इसके निर्माण से जुड़ी कठनाइयों को समझने के लिये एग़्वा हेल्थकेयर से हाथ मिलाया है वही महिंद्रा ने मात्र 7500/- में एक ऐसा पोर्टबल बैग मास्क वेंटिलेटर बनाया है जो अंतरिम जीवन रक्षक प्रणाली है।

कोरोना वायरस से जुड़ी इस जंग में,हर व्यक्ति व कंपनी अपने पूरे मन व संसाधनों से मानवता की सेवा में जुटी हैं।आख़िर मानव के अस्तित्व को बचाने का सवाल है। ज़िंदगी बचाने की इस जंग में इनका प्रयास सराहनीय है।

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