TOYS – खिलौनों की सुनहरी दुनिया

TOYS – खिलौनों की सुनहरी दुनिया

आज के एकल परिवारों में बच्चों का जीवन बहुत ही शान्त व अकेलेपन से गुज़र रहा है।इस तेज रफ़्तार व आपाधापी से भरपूर जीवन में माँ बाप अपने बच्चों को इतना समय भी नहीं दे पा रहे हैं की वह बच्चे की ज़रूरतों को समझें व उसके साथ कुछ वक़्त बिता सकें। बच्चे तमाम तरह की ऊर्जा से भरे पड़े हैं लेकिन इनका कहाँ इस्तेमाल करें,माँ बाप इस बात से बेख़बर है।संयुक्त परिवार टूटने का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ा है,जहाँ की विशाल छत्र-छाया में बच्चों को पनपने व खुल कर जीने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध थे, लेकिन एकल परिवार में उनके सपने ठहर गये प्रतीत होते हैं।जहाँ कुछ माता पिता अपने बच्चों को कम वक़्त दिए जाने की भरपाई खिलौनों से कर रहे हैं वहीं कुछ इसके महत्व को दरकिनार कर इसे फ़िज़ूलखर्ची समझ कर नकार रहे हैं।

बच्चों के जीवन पर खिलौनों का प्रभाव

हर बच्चे को खेलना पसन्द होता है।अगर खेल खेल में ही आप उसे ज्ञानवर्धक व संस्कारिक शिक्षा दे पाते हैं तो इससे बढ़िया कोई बात नहीं हो सकती है।इससे बच्चे के मानसिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है,जो उसे भविष्य में एक अच्छा व कामयाब इन्सान बनने में मदद करता है।साथ साथ खेलने से बच्चों में सहयोग की भावना विकसित होती है।खिलौने बच्चों की रचनात्मक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें कल्पनाशील व कार्यशील बनाने में भरपूर मदद करते हैं।वैज्ञानिक कारणों से भी यह सिद्ध हो चुका है की खिलौने बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में अहम भूमिका अदा करते हैं।आज दुनिया में लाखों ऐसे उदाहरण मौजूद हैं की बचपन में अपनी रुचि के खिलौनों से खेलने वाले बच्चे उसी फ़ील्ड में नामवर बन कर इज़्ज़त, शोहरत व पैसे कमा रहे हैं।खिलौनों से बच्चों व माँ बाप के बीच एक भावनात्मक सम्बन्ध पैदा होता है।भविष्य के रिश्तों में खिलौनों का भी उतना ही अहम योगदान है,जितना अन्य कारणों का।

बच्चों के लिये खिलौनों का चयन

खिलौनों के बग़ैर हम बच्चों की दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।हर माता पिता को अपनी जेब के अनुसार बच्चों के लिये खिलौनों की व्यवस्था ज़रूर करनी चाहिये।क्योंकि जहाँ खिलौनें बचपन का एक अहम हिस्सा है,वहीं बच्चों की शिक्षा का एक मज़बूत स्त्रोत हैं।खिलौनें न केवल बच्चों को ख़ुशी प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें सीखने के लिये भी प्रेरित करते हैं।हमें बच्चों के लिये ऐसे खिलौनों का चयन करना चाहिये जो खेल खेल में उनकी रचनात्मक क्षमता को विकसित करें और भविष्य में उनके विकास में भी काम आ सकें।खिलौना निर्माण की प्रक्रिया को अगर हम ग़ौर से देखें तो इसमें बड़े ही व्यापक स्तर पर विज्ञान व आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।आज हर उम्र के बच्चे को ध्यान में रखकर शिक्षाप्रद व मनोरंजन से भरपूर खिलौनों का निर्माण किया जा रहा है।बच्चों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर व उनके मनोभाव को समझ कर खिलौने बनाये जा रहे हैं।सोशल मीडिया पर भी अधिकांश चर्चित खिलौनों व इंडोर गेम्ज़ के रिव्यू उपलब्ध हैं।जिन्हें देखकर आप बच्चों की पसन्द व उनकी मानसिक क्षमता के आधार पर खिलौनों का चयन कर सकते हैं।

डिजिटल दुनिया से मिल रही चुनौतियाँ

आज बच्चों द्वारा मोबाइल व कम्प्यूटर पर घंटो समय बिताया जा रहा है।मासूम बचपन की राह में टच स्क्रीन की एक बड़ी दीवार खींच दी गयी है और बच्चे चाहकर भी इस दीवार को भेद नहीं पा रहे है।हमारी कुछ पल की नादानियाँ,बच्चों के जी का जंजाल बन गयी है।इलेक्ट्रोनिक गैजेट व विडियो गेम्ज़ ने परिवारों के सुख चैन को ख़त्म कर दिया है।आधुनिक युग में इनके महत्व से भी इनकार नहीं किया जा सकता है किन्तु इनके अंधाधुँध प्रयोग से बच्चों का मानसिक विकास अवरूद्द हो गया है।टैक्नोलोजी हमेशा दोधारी तलवार की तरह काम करती है।अतः ज़रूरत इस बात की है की बच्चों का ध्यान दूसरी तरफ मोड़ा जाये और उन्हें मनोरंजन के दूसरे साधनों से अवगत कराया जाए।आख़िर अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी जमा पूँजी को बचाना आप ही की ज़िम्मेवारी है।

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