SPIRIT OF SERVICE – सेवाभाव से भरी दुनिया

आज हम अपने आसपास नज़र दौड़ायें तो दुनिया में ग़रीबी, भुखमरी, बीमारी व साधनों की कमी के अनेकों उदाहरण सामने दिखाई पड़ते हैं।जहाँ इन ग़रीब व्यक्तियों के लिये दो वक़्त के खाने का इंतज़ाम भी बड़ी मुश्किल से हो पाता है वहीं जीवन स्तर के लिये ज़रूरी अन्य साधनों की अपेक्षा करना बेमानी है।ऐसे कठिन समय में समर्पण का भाव रखने वाले लाखों लोग तन,मन व धन से मानव की सेवा करने के लिये पूरी श्रद्धा व सेवाभाव से लगे हुए हैं और ऐसे ऐसे उदाहरण पेश कर रहें हैं, जिसे देखकर भगवान को भी उन्हें मनुष्य बनाने पर गर्व महसूस होता होगा।

ईश्वर प्राप्ति का सरल उपाय

जीवन मूल्य में संस्कारों का बड़ा महत्व है और संस्कारों में सबसे उत्तम संस्कार सेवाभाव है। समाज के कमज़ोर व दुर्बल वर्ग के प्रति सेवाभाव रखना जीवन में कामयाबी पाने का मूल मंत्र है।हमें अपने व्यवहार में सदैव प्रेम व सेवा भाव का समायोजन करना चाहिये।बिना सेवाभाव के किसी भी अच्छे कार्य को सम्पन्न नहीं किया जा सकता है।सेवाभाव ही मनुष्यता का धर्म हैं।समाज के किसी भी संप्रदाय, धर्म, जाति व दीन दुखियों की मदद के लिये निष्काम भाव से किया गया कर्म ही इंसान को ईश्वर के समीप जाने का अवसर प्रदान करता है,आख़िर इंसान ईश्वर का ही अंश है और इंसान की ख़ुशी में ही ईश्वर समाहित है।

मन की असीम शान्ति का प्रतीक

निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य दूसरों के अलावा स्वयं को भी एक अजीब तरह की शान्ति प्रदान करता है।सेवा करते समय मुख पर हमेशा मुस्कराहट, मन में सन्तोष व शब्दों में दया भावना का समावेश होना चाहिये। सेवाभाव रखने से पुण्य के साथ साथ असीम शांति की प्राप्ति होती है, ऐसी शांति व सुकून जो किसी पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता है। सेवाभाव से मन निर्मल होता है।मन को लोभ, लालच, व द्वेष से मुक्ति पाकर ईश्वर द्वारा बनाई गयी सेवाभाव की अनुपम कला को सीखा जा सकता है।एक ऐसी कला जो मनुष्य को सर्वकालिक ऊँचाइयों पर पहुँचा देती है।

मानवता का सबसे बड़ा धर्म

सेवाभाव के ज़रिए ही सम्पूर्ण मानव जाति के विकास व उत्थान की परिकल्पना की जा सकती है व समाज में व्याप्त बुराइयों का समूल नाश करके लोगों में सामाजिक दायित्व की भावना जगाई जा सकती है।अगर आप निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा कर रहे हैं तो यही सबसे बड़ा धर्म हैं।जो आपके पास है, उसी से शुरुआत कीजिए।अगर आपके पास ज्ञान है तो लोगों को शिक्षित कीजिए, धन है तो लोगों की मदद कीजिए, शक्ति है तो निर्बल की रक्षा कीजिए और अगर संगीत है तो आनन्द व ख़ुशियाँ बाँटिये।अपने सामर्थ्य अनुसार, पूरे सेवाभाव से, अपने अन्दर के प्रेम व स्नेह को पूरी दुनिया पर लुटा दीजिए। सेवाभाव से किया गया कोई भी कार्य आपको ज़िन्दगी के ऐसे अनुपम क्षण प्रदान करेगा, जिन पर आपको सारी उम्र गर्व होगा।

सेवाभाव की असीमित सीमायें

भारतीय संस्कृति व दर्शन में सेवाभाव को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है जो मनुष्य को निष्काम कर्म के लिये प्रेरित करता है। सेवाभाव मात्र मनुष्यों के साथ ही नहीं अपितु पशु पक्षियों, पेड़ पौधों व प्रकृति के तमाम रूपों के साथ उसी प्यार व विश्वास के साथ करना चाहिए, जो हम इंसानों से करते आयें हैं।प्रकृति हमारे द्वारा की जाने वाली सेवा का कई सौ गुणा हमें वापिस लौटा देती है।बस इसको समझने की ज़रूरत होती है की यह किस रूप में हमारे पास वापिस आ रहा है। धन्यवाद व जय हिन्द

Leave a Reply