SINGLE SECTOR मतलब इकॉनोमी का बँटाधार

SINGLE SECTOR मतलब इकॉनोमी का बँटाधार

दुनिया भर में कोरोना के शिकंजे में फँसें देश लम्बे लॉकडाउन से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिये जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। लॉकडाउन ने इन देशों की आय पूरी तरह से ख़त्म कर दी है।वैश्विक इकॉनोमी अत्यन्त बुरी हालत में पहुँच चुकी है।दरअसल कई देशों की बुरी हालत के लिये उनकी ख़ुद की आर्थिक नीतियाँ ज़िम्मेवार हैं।इन देशों ने केवल एक या दो सेक्टर में ही औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जिससे इस संकट काल में उस सेक्टर के ठप्प होने से उनकी अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गयी और उन्हें बहुत बड़ी मुश्किल में डाल दिया। विश्व बैंक के अनुसार केवल भारत व चीन ही इस मुश्किल हालात से आसानी से निकल पायेंगे क्योंकि विशाल जनसंख्या, मज़बूत अर्थव्यवस्था व सभी सेक्टरों में व्यापक उपस्थिति, उन्हें कोरोना संकट से निकलने में अहम भूमिका निभायेगी।

SINGLE SECTOR मतलब इकॉनोमी का बँटाधार

मिडिल ईस्ट का बुरा हाल

कोरोना वायरस ने पूरे मिडिल ईस्ट को घुटनों के बल खड़ा कर दिया है।कुछ समय पूर्व तक सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन व कुवैत जैसे देश तेल बेचकर अरबों रुपए के वारे-न्यारे कर रहे थे। तेल के साथ पर्यटन उद्योग भी उनके लिये कामधेनु साबित हो रहा था।लेकिन कोरोना के एक वार ने सब कुछ तहस नहस कर दिया है।लम्बे लॉकडाउन से कच्चे तेल की क़ीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गयी जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था को भारी नुक़सान पहुँचा है।अंतराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें 2 दशक के निचले स्तर पर पहुँच गयी हैं।इससे सऊदी अरब के राजस्व में 22% तक की कमी दर्ज की गयी है। सऊदी अरब ने अपनी अर्थव्यवस्था को उबारने के लिये पूरे देश में वैट की दर को 5% से बढ़ा कर 15% कर दिया है और करदाताओं को दी जाने वाली अनेकों सहूलितों को समाप्त कर दिया है।सऊदी अरब, क़तर व अबुधाबी बॉंड बेचकर पैसे इकट्ठा कर रहे हैं।दुनिया भर में पर्यटन के लिये प्रसिद्द दुबई की कमर पूरी तरह से टूट चुकी है।दुबई में प्रतिवर्ष 1 करोड़ 60 लाख लोग घूमने आते हैं जो अरबों रुपए की विदेशी मुद्रा ख़र्च करते हैं।दुबई चेंबर ऑफ़ कामर्स के सर्वे के अनुसार अगले छः महीने में 70% बिज़नेस कोरोना वायरस के चलते बन्द हो सकते हैं और रियल एस्टेट की 50% कम्पनियाँ दिवालिया घोषित हो सकती हैं।आगामी 1 वर्ष तक पर्यटन में सुधार होने की कोई सम्भावना नहीं है।

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बंगलादेश की टूटी कमर

अरब देशों की तरह बंगलादेश ने भी केवल एक उधोग पर अपनी अर्थव्यवस्था की नींव टिका रखी है। बंगलादेश सिले सिलाये वस्त्रों को बहुत बड़ा उत्पादक देश है।यहाँ की फ़ैक्ट्रियो में यूरोपीय देशों के लिये रेडीमेड वस्त्रों का निर्माण किया जाता है।फ़िलहाल सभी उद्योग धन्धे बन्द हैं क्योंकि यूरोप के सभी देशों ने कोरोना वायरस के चलते अपने तमाम ऑर्डर रद्द कर दिये हैं।इससे बंगलादेश के कपड़ा उद्योग पर संकट के बादल छा गये हैं।बंगलादेश के तक़रीबन 50 लाख लोग इस उद्योग से सीधे जुड़े हुए हैं।इनमें भी आधी संख्या महिलाओं की है।बंगलादेश से हर साल क़रीब 32 अरब डॉलर के कपड़े का निर्यात किया जाता है जो उसके कुल निर्यात का 83% है।बंगलादेश की अर्थव्यवस्था ही पूरी तरह कपड़ों के निर्यात पर टिकी है।कोरोना के चलते क़रीब 60 फ़ीसदी कारख़ानों को बन्द करना पड़ा है।इससे सरकार पर गम्भीर संकट पैदा हो गया है और लाखों लोगों के लिये रोज़ी रोटी का जुगाड़ करना अत्यंत मुश्किल साबित हो रहा है।

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थाईलैंड की ख़स्ता हालत

थाईलैंड की अर्थव्यवस्था भी मूलतः पर्यटन पर आश्रित है।थाईलैंड धूमने फिरने के साथ साथ दुनिया के सबसे बड़े चिकित्सा पर्यटन बाज़ार में उभर रहा है।कम लागत में बेहतरीन व उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा के लिये पूरी दुनिया के लाखों पर्यटक थाईलैंड का रूख करते हैं।प्रतिवर्ष क़रीब 20 लाख लोग थाईलैंड घूमने व अपना इलाज करवाने आते हैं।2019 में थाईलैंड ने पर्यटन से लगभग 70 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा एकत्र की थी। लेकिन कोरोना ने थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया है।केवल पर्यटन क्षेत्र में ध्यान देने के कारण अर्थव्यवस्था व शेयर बाज़ार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। तमाम टूरिस्ट स्पॉट, होटल,एयरलाइंस, मॉल व मसाज केन्द्र बन्द पड़े हैं।थाईलैंड के मरीन पार्क व सफ़ारी वर्ल्ड जैसे विश्व प्रसिद्द पर्यटन स्थल आज सुनसान है।अब सरकार विदेशी मुद्रा प्राप्ति के लिये किसी अन्य सेक्टर पर ध्यान देने की योजना बना रही है।थाईलैंड के साथ अन्य पूर्वी व दक्षिण पूर्वी देशों को भी केवल एक सेक्टर पर निर्भर रहने से बहुत भारी नुक़सान उठाना पड़ा है।इनमे इंडोनेशिया, फ़िलिपींस, कम्बोडिया व लाओस जैसे छोटे देश शामिल है।इन तमाम देशों को अपनी आर्थिक रणनीति को बदलना पड़ा है और यही वक़्त की ज़रूरत है। धन्यवाद व जय हिन्द

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