RELIGION – धर्म के मायने

RELIGION – धर्म के मायने

धर्म (Religion) जितना छोटा शब्द है उतने ही उसके गहरे अर्थ हैं।धर्म ज़िंदगी जीने का एक तरीक़ा है। दुनिया में सभ्यता की शुरुआत से ही हमें धर्म की शिक्षा प्रदान की जाती है। धर्म एक ऐसी आस्था है जो हमें ख़ुद पर विश्वास के साथ दूसरों को प्यार करना व उनका आदर सत्कार करना सिखाती है। धर्म के अनुसार जो अपने लिये अनुकूल न हो वैसा व्यवहार दूसरों के साथ नहीं करना चाहिये।अर्थात धर्म मनुष्य को नैतिक जीवन का पाठ पढ़ाकर संतुलित जीवन जीना सिखाता है।धर्म आत्मा को परमात्मा से मिलाने की सबसे ऊँची व भरोसेमन्द सीढ़ी है।धर्म की अनेकों परिभाषाएँ हैं, जिनमें सत्य के मार्ग पर चलना ही सबसे प्रमुख धर्म है।

धर्म का शाब्दिक अर्थ है धारण करने योग्य, अर्थात धर्म को सभी को धारण करना चाहिये।धर्म में प्रेम, अहिंसा, न्याय, मानवता, इंसानियत व वैश्विक भाईचारा आदि गुण समाहित होते हैं।एक सच्चा धर्म हमेशा ही सकारात्मक संदेश ही प्रसारित करता है।ऐसे संदेश जो लोगों को सत्य के पथ पर अग्रसर कर उनकी ज़िन्दगी में आमूलचूल परिवर्तन ला सकें।धर्म का अर्थ वस्तुतः एक मान्य नियमों के पालन व उन नियमों को अपने जीवन में ढालकर अपने व अपने समाज की बेहतरी के लिये कार्य करने से है।धर्म कर्म प्रधान होता है,लेकिन यह सिर्फ़ क्रिया या कर्मों से सम्बन्धित नहीं है बल्कि चिन्तन व वाणी से भी सम्बन्धित है।ज़िन्दगी में हम जो सद्कर्म धारण करते हैं वही धर्म है।इन्ही सद्कर्मों से हम ख़ुद को व समाज को बदल कर एक नयी सोच पैदा कर सकते हैं।धर्म जीवन का शाश्वत व सार्वभौमिक तत्व है।भगवान महावीर ने कहा था की धर्म शुद्ध आत्मा में विचरण करता है और शुद्ध आत्मा का दूसरा नाम है,अपने स्वभाव में रमण करना व स्वयं के द्वारा स्वयं को खोजना।धर्म को हम अपने भीतर न तलाश कर मन्दिर, मस्जिद व गुरुद्वारे में शीश झुकाते हैं लेकिन धर्म की मूल अवधारणा को याद रखना भूल जाते हैं।

विश्व के सभी क्षेत्रों को धर्म ने पुरज़ोर तरीक़े से प्रभावित किया है।धर्म ने लोगों की जीवन शैली में बदलाव से लेकर उनकी सामाजिक,आर्थिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को बदल डाला है।आज पूरी दुनिया में राजनीति भी धर्म से प्रभावित है।धर्म में राजनीति के घालमेल ने पूरे धर्म को ही दूषित कर दिया है।धर्म के ये ठेकेदार विभिन्न सम्प्रदायों में फूट डालकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और नफ़रत, हिंसा व पाखण्ड के ज़रिये लोगों को गुमराह कर रहे हैं।जबकि धर्म का अर्थ ही सच्चाई व इंसानियत के रास्ते पर चलकर सौहार्द फैलाना है, जिसका समाज के सभी वर्गों को व्यापक फ़ायदा हो और एक नेक राह पर चल कर अपना व दूसरों का जीवन बेहतर कर सकें।

धर्म हमें कई बहुमूल्य शिक्षाएँ प्रदान करता है।इन शिक्षाओं में अपने कर्तव्य का पालन करना, अहिंसा का समर्थन करना, सच्चाई की राह पर चलना व सदा न्याय के पक्ष में खड़े होना, शामिल है। धर्म सीधा नैतिकता से जुड़ा हुआ होता है क्योंकि यह हमें सत्य के नज़दीक लेकर जाता है।दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण व असली धर्म है मानवता का धर्म।वह धर्म जिसमें दया, क्षमा और उदारता कूट कूट कर भरी हो क्योंकि धर्म दिलों को जोड़ने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। धर्म ही हमें जीने का सही मार्ग दिखाता है।हम धर्म द्वारा दिखाये गये इसी मार्ग पर चलकर अपना व दूसरों का जीवन सुधार सकते हैं। यही धर्म की असली जीत होगी।धन्यवाद व जय हिन्द

This Post Has One Comment

  1. minakshi22585830

    धर्म व्यक्ति को देवत्व की ओर ले जाने वाला माध्यम था आज उसी की आड़ लेकर व्यक्ति पशुत्व की ओर बढ़ रहे है

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