POVERTY – ग़रीबी की मार दुनिया लाचार

POVERTY – ग़रीबी की मार दुनिया लाचार

हम अपने आसपास नज़र दौड़ायें तो बड़ी ही विस्फोटक स्थिति नज़र आती है।आज दुनिया दो भागों में बँट चुकी है।एक तरफ़ अमीर वर्ग,जिसके पास दुनियाभर की तमाम सुविधाएँ,पैसा व पावर है और दूसरी तरफ़ भूख से बिलबिलाती,पीड़ा से कराहती व अपने मुक़द्दर को कोसती ग़रीब जनता,जो अपने तन को ढकने व सिर छुपाने के लिये सालों से छत तलाश रही है।समाज में अमीर-ग़रीब के बीच की खाई और चौड़ी होती जा रही है।यह कोई आज की स्थिति नहीं है बल्कि सैंकड़ों वर्षों से चली आ रही है।इस जानलेवा परिस्थिति के लिये समाज का प्रत्येक वर्ग ज़िम्मेवार है।संसाधनों के असमान वितरण ने भी आग में धी डालने का काम किया है।आज दुनिया के 5 फ़ीसदी अमीरों के पास दुनिया की 95 फ़ीसदी परिसम्पत्तियाँ है। संसाधनों के इस असमान वितरण ने ग़रीबी को पूरी दुनिया में निकृष्टम पादान पर पहुँचा दिया है।इससे अमीर वर्ग के प्रति घृणा लगातार बढ़ती जा रही है और इसने ग़रीब समुदाय को दो वक़्त की रोटी के लिये के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने को मजबूर कर दिया है।महात्मा गांधी ने भी कहा है ‘ग़रीबी हिंसा का सबसे बुरा रूप है’। आख़िर इसका समाधान क्या है,क्या समाज के शोषित व सताये हुए व्यक्ति को कभी न्याय व बराबरी का हक़ मिलेगा,इसका जवाब भविष्य की गहराइयों में छुपा है।

POVERTY - ग़रीबी की मार दुनिया लाचार

ग़रीबी संसार की सबसे विकट समस्या है।जिसने हर देश के सामाजिक व आर्थिक ढाँचे को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है।असल में ग़रीबी एक कुचक्र है जिसे तोड़ने के लिये एक पीढ़ी से दूसरी या कभी कभी तीसरी पीढ़ी तक संघर्ष करना पड़ता है।कई बार इसको तोड़ने के चक्कर में ग़रीब ही ख़त्म हो जाता है लेकिन ग़रीबी जस के तस बनी रहती है। पूरे विश्व में ग़रीबी का सबसे बड़ा कारण अशिक्षा है।अशिक्षा के साथ ही बेरोज़गारी व जनसंख्या में बढ़ोतरी जैसे मुद्दे अपने आप ही जुड़ जाते हैं।अगर व्यक्ति साक्षर होगा तो वह जीवन की तमाम परिस्थितियों को समझनें में व उनसे निपटने में सक्षम होगा।एक बार व्यक्ति इस कुचक्र में फँस जाये तो आने वाले समय में बीमारी व प्राकृतिक आपदा जैसी समस्याएँ उसे तोड़ कर रख देती हैं।इसके अलावा भी सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियां, धन का असमान वितरण, जनकल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच न होना व रोज़गार में कमी जैसे कारणों ने ग़रीब की कमर तोड़ कर रख दी है और ग़रीब के जीवन को बद से बदतर की हालत में पहुँचा दिया है।

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क्या कभी ग़रीबी हटाई जा सकती है दुनिया में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है।जिसको पूरा न किया जा सके।इसके लिए ज़रूरत है एक मज़बूत इच्छाशक्ति की,सही सरकारी नीतियों की और ग़रीबों के उत्थान की अलख जगाने की।बात कड़वी मगर ये सत्य है दुनियाभर की अधिकांश सरकारें राजनैतिक कारणों से ग़रीब को ग़रीब ही बनाये रखना चाहती हैं।लेकिन यहाँ हम राजनैतिक कारणों में न जाते हुए ग़रीबी हटाने के कुछ उपाय पर ध्यान देंगे।शिक्षा का प्रसार – शिक्षा व्यक्ति का मूलभूत अधिकार है।हर ग़रीब व्यक्ति के लिये उनकी बस्ती या निकट स्थान पर अच्छे स्कूल की व्यवस्था होनी चाहिये।उन्हें मुफ़्त में अच्छी शिक्षा के साथ साथ खाना भी उपलब्ध करवाना चाहिये ताकी वह निश्चिन्त होकर अपनी पढ़ाई में ध्यान लगा सके। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच – ग़रीब आदमी के लिये अपने या परिवार के स्वास्थ्य पर ध्यान देना दूर की कोड़ी है। ग़रीबों को उत्कृष्ट चिकित्सा उपलब्ध करवाना सरकार की ज़िम्मेवारी है।इलाज के दौरान पोष्टिक खाना देना भी इसी ज़िम्मेवारी का एक अंग है।आय के साधनों का विस्तार – ग़रीब व्यक्ति की न्यूनतम आय निर्धारित होनी चाहिये।उनके कार्य का विस्तार करने के लिये प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिये।एक निश्चित आयु के पश्चात उनके लिये पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिये।स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा – ग़रीबों को उनके रहने की जगह के आसपास काम उपलब्ध करवाया जाना चाहिये।ताकि विस्थापित होकर दर दर भटकने से बच जायें व घर रहकर कुछ पैसे जोड़ सकें। इसके अलावा भी सरकारें बिजली पानी की सुविधाएँ देकर व उन्हें असंगठित क्षेत्र के क़र्ज़ों के जाल से मुक्ति दिला सकती है।

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ग़रीबी का उन्मूलन समग्र विकास के द्वारा ही संभव है।अतः हर देश की सरकार को अपने अथाह संसाधनों का इस्तेमाल ग़रीबों की आर्थिक सहायता में और उनके कल्याण की योजनाएँ बनाने में करना चाहिये।दुनियाभर की सरकारें ग़रीबी उन्मूलन के लिये कई योजनाएँ बनाती रही हैं लेकिन उनके संसाधन कम पड़ जाते हैं ।ग़रीबी केवल एक इंसान या वर्ग की समस्या नहीं अपितु पूरे विश्व की समस्या है।अतः सबको मिलजुल कर इसके लिये प्रयास करना चाहिये। धन्यवाद व जय हिन्द

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