ONE BELT ONE ROAD – चीन की डूबती नैया

ONE BELT ONE ROAD – चीन की डूबती नैया

वन बेल्ट वन रोड जिसे संक्षिप्त में ओबीओआर भी कहा जाता है,चीन की वह महत्वाकांक्षी योजना है जिसमें पुराने सिल्क मार्ग के आधार पर एशिया, अफ़्रीका व यूरोप के क़रीब 66 से अधिक देशों की 4.4 अरब जनसंख्या तक एक आर्थिक गलियारा बनाकर सड़क व रेल मार्ग द्वारा पहुँचा जा सके और अपने तैयार माल को खपाया जा सके। दरअसल चीन दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और उसे उत्पाद बेचने के लिये बड़े बाज़ारों की तलाश है।चीन ने इन आर्थिक गलियारे के मध्य आने वाले देशों को अपने स्थानीय स्तर पर बनने वाले उत्पादों को बेचने के लिये एक बड़े बाज़ार व पूरी दुनिया तक उत्पादों की पहुँच के बड़े बड़े सपने दिखाये और उन्हें इसके लिये आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया।असल में चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों से मध्य एशिया से दक्षिणपूर्व एशिया और मध्यपूर्व तक पैठ बनाकर इन देशों में अपना आधार बनाना चाहता था। चीन ने इन ग़रीब व विकासशील देशों में आधारभूत ढाँचा तैयार करने व सड़क, रेलमार्ग, फ़्लाईओवर व हाईवे को बनाने के नाम पर अत्यन्त महँगा क़र्ज़ प्रदान किया।जब यह देश क़र्ज़ चुकाने में नाकाम रहे तो इनके नैसर्गिक संसाधनों का जमकर दोहन किया गया।

ONE BELT ONE ROAD - चीन की डूबती नैया

एशिया का एक छोटा देश लाओस जिसकी अर्थव्यवस्था लगभग 10000 करोड़ की है।चीन ने यहाँ रेलवे व हाईवे के निर्माण के लिये 5000 करोड़ रूपए का निवेश किया था। महँगी व अनुचित ब्याज दरों से लाओस समय पर भुगतान नहीं कर पाया।आज लाओस की 50% अर्थव्यवस्था पर चीन का क़ब्ज़ा है।चीन ने श्री लंका को हम्बनटोटा बन्दरगाह के विकास के लिये 1 अरब डालर का ऋण प्रदान किया था।कठोर शर्तों के कारण श्री लंका समय पर ब्याज चुकाने में असमर्थ रहा। मजबूरन उसे इस बन्दरगाह को चीन को 99 वर्षों की लीज़ पर सौंपना पड़ा।आज चीन बड़े मज़े से इसका संचालन कर रहा है। पिछले तीन वर्षों में चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीति से कई देश बख़ूबी परिचित हो चुके हैं और अपने स्तर पर इसका विरोध कर रहे हैं। मलेशिया ने चीनी प्रभुत्व को नकारते हुए क़रीब 22 बिलियन डालर की परियोजना से हाथ खींच लिये हैं और इनमें रखी गयी शर्तों को मलेशिया के हितों के ख़िलाफ़ बताया है। म्यांमार ने भी ख़तरे का आभास होते ही चीन के साथ 10 अरब डालर के क़रार को सीमित कर दिया है। थाईलैंड अपने 3000 करोड़ के प्रोजेक्ट को स्थगित कर चुका है। उज़्बेकिस्तान ने चीनी क़र्ज़ को अपनी अर्थव्यवस्था के लिये ख़तरनाक बताते हुए कई परियोजनाओं को रद्द कर दिया है। तंजानिया ने चीन के साथ अपने 10 अरब डालर के समझौते को समाप्त कर दिया है और कहा है कोई शराबी ही ऐसी शर्तों को स्वीकार कर सकता है।

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चीन का ओबीओआर के तहत सबसे बड़ा निवेश पाकिस्तान में है जोकि तक़रीबन 50 अरब डालर का है।इसमें चीन सीपीईसी (चाईना पाकिस्तान इकनोमिक कोर्रिडोर ) के तहत इस गलियारे में इंडस्ट्री ज़ोन, बिजली ग्रिड, तेल व गैस पाइप लाइन व समुंद्री बन्दरगाह का निर्माण करेगा। चीन गवादर बन्दरगाह को विकसित कर, उससे होने वाली आय का 91% हिस्सा ख़ुद रखेगा।पाकिस्तान मात्र 9% हिस्से का हक़दार होगा।इसके साथ ही गवादर बन्दरगाह को 23 साल तक किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा।पाकिस्तान की ख़स्ता आर्थिक हालत चीन के लिये वरदान सिद्ध हुई है और पाकिस्तान ख़तरे को भाँपने में बुरी तरह से विफल रहा है। चीन ने भारत पर भी डोरे डालने की भरपूर कोशिश की है और उसे कई आर्थिक पैकेज देने की कोशिश की है परन्तु भारत ने उसे सिरे से नकार दिया है।पाकिस्तान चीन आर्थिक गलियारा, जो की पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर से होकर गुज़रता है,भारत ने इसे अपनी संप्रभुता का हनन व अन्तर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन बताया है।दरअसल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो खुलकर इस परियोजना का विरोध करता आ रहा है।

ONE BELT ONE ROAD - चीन की डूबती नैया

चीन की इस महत्वपूर्ण परियोजना पर कोरोना संक्रमण काल ने ताबूत पर आख़िरी कील ठोक दी है।इस वायरस को छुपाने के लिये व उसके बाद के अनैतिक सौदों ने चीन की पोल खोल कर रख दी है।आज दुनिया के अधिकांश देश चीन के साथ पूर्व में हुए अपने समझौतों की दुबारा समीक्षा कर रहे हैं।विकसित देशों के साथ साथ तीसरी दुनिया के देश जैसे क़ीनिया, गिनी, तंजानिया आदी भी आज चीन को आँख दिखा रहे हैं।चीन की विस्तारवादी नीतियों के ख़िलाफ़ फ़िलीपींस व वियतनाम अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जाने का मन बना चुके हैं।मौजूदा समय चीन पर क़हर बनकर टूट रहा है।क्या चीन इन सबसे उबर पायेगा,यह भविष्य की गर्त में छुपा है। धन्यवाद व जय हिन्द

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