NAVRATRI – नवरात्रि

नवरात्रि एक संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है “नौ रातें”।नवरात्रि के इन नौ दिनों में जगत जननी माँ भगवती के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। माता के यह नौ रूप ग्रहों की शांति और उनसे जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिये पूजे जाते हैं।माँ सम्पूर्ण मानव जाति को शक्ति,स्फूर्ति और विनम्रता प्रदान करती है।यदि भक्तजन इन नौ दिनों में अपनी पूरी भक्ति व श्रद्धा भाव से,पूरे नियम के साथ माँ की पूजा करें तो मनचाहे फल की प्राप्ति होती है।माँ भगवती का मतलब ही पूरे जगत का कल्याण है।

नवरात्रि के पहले दिन लोग पूरे विधि विधान से घट स्थापना करते हैं।और माँ शैल पुत्री की पूजा करते हैं। माँ शैल पुत्री को हेमावती व पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। माँ का यह स्वरूप सभी भाग्य का विधाता है।माँ शैल पुत्री चंद्रमा के पड़ने वाले किसी भी बुरे प्रभाव को नियंत्रित करती है और आम जन को राहत प्रदान करती है।

नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की की जाती है। माँ के इस रूप को अर्पणा के नाम से जाना जाता है।माँ ब्रह्मचारिणी को मंगल ग्रह की स्वामिनी के तौर पर जाना जाता है। माँ मंगल ग्रह के किसी भी बुरे प्रभाव का ख़ात्मा करती है।और लाभ प्रदान करती है।

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है।यह देवी पार्वती का ही विवाहित रूप है। चाँद की तरह चमकने वाली माँ गौरी ने जब भगवान शिव से शादी करने के बाद अपने माथे को अर्ध चन्द्र से सजाना शुरू किया तो माँ को चन्द्रघंटा के रूप में जाना,जाने लगा। शुक्र ग्रह की स्वामिनी माँ की मुद्रा अत्यंत शान्तिपूर्ण है। माँ अपने भक्तों के कल्याण के लिये हमेशा तत्पर रहती है।

नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के कुषमाँड़ा स्वरूप की पूजा की जाती है।माँ सूर्य के अंदर रहने की अपार शक्ति को समेटे हुए है। माँ के शरीर की चमक सूर्य के समान चमकदार है। माँ के इस रूप को अष्ट भुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है।माँ अपने भक्तों को सूर्य की दिशा व ऊर्जा प्रदान करती है। अर्थात पूरा जगत माँ की पहुँच में सुरक्षित है।

नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कन्द माता की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है। माँ स्कन्द माता,माँ पार्वती का ही एक रूप है।माँ स्कन्द माता का रंग शुभ्र है।जो उनके श्वेत रंग का वर्णन करता है।माँ देवी के इस रूप की पूजा करने वाले को भगवान कार्तिकेय की पूजा का लाभ भी प्राप्त होता है।कार्तिक स्वामी की माता जाने वाली माँ की मुद्रा मातृत्व है।जो समस्त ज़नो को आशीर्वाद व ममता प्रदान करती है। माँ बुध ग्रह की स्वामिनी है,जो बुध ग्रह के समस्त विकारों व बुरे प्रभाव का ख़ात्मा करती है।

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है।माँ पार्वती ने राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए देवी कात्यायनी का रूप धारण किया था।कात्यायन आश्रम में जन्मी माँ का यह सबसे हिंसक रूप है। गुरु ग्रह की स्वामिनी माँ कात्यायनी अपने भक्तों के समस्त दुःखों का हरण करने के लिए सदैव तत्पर रहती है।

नवरात्रि के सातवें दिन को महा सप्तमी भी कहा जाता है।इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है।माँ पार्वती ने शुम्भ और निशुम्भ नाम के दो राक्षसों का वध करने के लिए अपनी बाहरी सुनहरी त्वचा को हटाकर देवी कालरात्रि का रूप धारण किया था। काल का नाश करने वाली माँ कालरात्रि का यह रूप माँ पार्वती के सबसे क्रूर रूप में से एक है। माँ शनि ग्रह की स्वामिनी है। अपने भक्तों को शनि ग्रह के प्रकोप से बचाने के लिए माँ हमेशा काल से टकराती रहती है।

नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन को महाअष्टमी के रूप में भी जाना जाता है।अपने अत्यधिक सफ़ेद रंग के कारण ही देवी को महा गौरी के नाम से जाना जाता है।माँ महागौरी केवल सफ़ेद वस्त्र धारण करती है।राहु ग्रह की स्वामिनी माँ अपने समस्त भक्तों को राहु के वार से बचाती है।

नवरात्रि के नौवे दिन शक्ति की सर्वोच्च देवी माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भगवान शिव के बायें भाग से प्रकट हुई माँ अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।माँ केवल मनुष्यों द्वारा ही नहीं बल्कि देव,असुर,गंधर्व व यक्ष द्वारा भी पूजी जातीं हैं। केतु ग्रह की स्वामिनी,सर्व सिद्धि देने वाली माँ अपने भक्तों को समस्त दुखों व कठिनाइयों से मुक्ति दिलाती है।

नवरात्रि के यह नौ दिन माँ भगवती को समर्पित किए जाते हैं।जहाँ पहले तीन दिन माँ दुर्गा को समर्पित हैं।जिससे माँ जैसी ऊर्जा व शक्ति प्राप्त की जा सके।वही चौथे,पाँचवे व छठे दिन माँ लक्ष्मी की पूजा होती है।जिससे सुख,समृद्धि व शांति की प्राप्ति हो।सातवें दिन कला व ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। आठवें दिन एक यज्ञ किया जाता है।जिसके बाद देवी दुर्गा को सम्मान सहित विदा किया जाता है।नौवे दिन,महानवमी के दिन देवी स्वरूप 9 कन्याओं का पूजन किया जाता है।पूरे सम्मान के साथ इन कन्याओं के पैर धोकर उन्हें भोजन ग्रहण करवाया जाता है। और उपहार में नए वस्त्र प्रदान किए जाते हैं। नवरात्रि का यह पर्व पूरे हिंदू समाज को अवश्य मनाना चाहिए।

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