MEDITATION – ध्यान की शक्ति

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इंसान इतना व्यस्त है की वह चाहकर भी अपने लिये, घर-परिवार के लिये व अपने समाज के लिये समय नहीं निकाल पा रहा है।जीवन की इस आपा धापी में तनाव साफ़ नज़र आने लगा है।इसी तनाव को कम करने व जीवन में एकाग्रचित होकर मानसिक शक्तियों का आह्वान करने की प्रक्रिया ही MEDITATION है।आईये जीवन की अदभुत व जीवन बदलने वाली इस क्रिया के बारे में जानते हैं।

चित या मन को एकाग्रचित करके,दिमाग़ को विचार शून्य करना ही ध्यान है अर्थात मन में बिना कोई विचार आए मन को किसी एक विषय वस्तु पर ध्यान केंद्रित करना ही ध्यान है।ध्यान मन को प्रशिक्षित करने का एक तरीक़ा है।इसमें ध्यान की अलग अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है पर इन सभी तरीक़ों का मक़सद मन को शांति व शीतलता प्रदान करना है।ध्यान मूल रूप से जीवन की पवित्र व रहस्यमय ताक़तों को समझने के लिये किया जाता है।इस अभ्यास से हम अपने मन के पैटर्न व आदतों को सीखते हैं।इन्ही आदतों को जानकर हम अपने मन को एक शांत आत्मा में बदलते हैं। यही शांत आत्मा हमें जीवन की गहराईयों में ले जाती है।और हम जीवन की आंतरिक शक्ति को जानने लगते हैं।और अपने अंदर की शक्ति को जानना ही ध्यान है। ध्यान करने से अपने आसपास की चीज़ों को सकारात्मक तरीक़े से देखने की समझ विकसित होती है।और यही समझ हमें भावनात्मक कल्याण व समग्र स्वास्थ्य दोनों का लाभ प्रदान करती है।

हज़ारों वर्षों से भारत व चीन में लोग ध्यान लगाने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखे हुए हैं।आधुनिक युग में बढ़ते तनाव व भोगवादी जीवन शैली ने दुनियाभर की नज़रे ध्यान पर डाली हैं।और ध्यान ही वह साधन है जो पूरी दुनिया को शांति व संतुलन का पाठ पढ़ा सकता है। ध्यान लगाने व सीखने के लिये कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।आईये सीखने की कोशिश करते हैं। 1. एक जगह निर्धारित करें – ध्यान लगाने की जगह साफ़ सुथरी व शांत होनी चाहिए। आख़िर सफ़ाई में भगवान बसते हैं। और जगह अगर प्रकृति की गोद में है,तो ध्यान लगाने का मनोरथ स्पष्ट व साफ़ हो जाता है ।2.एक समय निर्धारित करें – ध्यान लगाने के लिये समय पूर्व निर्धारित होना चाहिये तभी आप इसको मन से अपना सकते हैं।बार बार समय बदलने से इसका मक़सद ख़त्म हो जाता है। 3.अपने शरीर पर ध्यान दें – ध्यान लगाते वक़्त बैठने या लेटने की मुद्रा स्थिर होनी चाहिये।अपने शरीर को शिथिल व शांत छोड़ दें और अपनी आँखें बंद कर लें।4.अपनी साँस को महसूस करें – ध्यान लगाने के इस सबसे महत्वपूर्ण चरण में आप अपनी साँस को नियंत्रण करने का कोई प्रयास न करें।बस स्वाभाविक तरीक़े से साँस ले।साँस लेते व छोड़ते वक़्त अपनी साँस के आने-जाने की प्रक्रिया पर ध्यान दें।इसी वक़्त मन में उठे उन विचारों पर ध्यान न दें जिनमे आप खो जाते हैं। जैसे हमारा सपने देखने पर कोई नियंत्रण नहीं होता है वैसे ही विचारों के इस सैलाब को बहा दें। बस अपनी साँसो के आवागमन को देखते रहिये।कुछ देर बाद अपनी आँखें खोलें।एक लम्बी साँस ले।और अपने ईश्वर का धन्यवाद करें। ध्यान लगाने की इस प्रक्रिया को निरंतर करते रहें।कुछ दिनो के अभ्यास के बाद ही आपके मन में उठने वाले विचारों में ठहराव आना शुरू हो जायेगा।और आप ध्यान के परम सुख की अनुभूति कर पायेंगे।

ध्यान की प्रक्रिया आदिकाल से चली आ रही है।समय बीतने के साथ साथ इसमें नवीनतम तकनीक़ों का प्रयोग किया जाने लगा।और यह आधुनिक चिकित्सा का सहायक अंग बन गया है।जैसे शरीर को फ़िट रखने के लिये कसरत या जिम करने की आवयकता होती है,ठीक उसी तरह मन को तनाव रहित करने के लिये ध्यान की ज़रूरत होती है।ध्यान की साधना करने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।एक अत्यंत शांत जगह और एकाग्र मन से ध्यान लगाने से मौन की प्राप्ति होती है।और मौन की प्राप्ति का मतलब जीवन की तमाम कमियों पर विजय पाना है।ध्यान एक विज्ञान है।यह किसी धर्म से नहीं जुड़ा हुआ है।लेकिन दुनिया के सब धर्मों में इसका व्यापक उल्लेख है। ध्यान आत्मा को परमात्मा से मिलाने की सीढ़ी है।

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