LONELINESS – अकेलेपन से कैसे बचेंगे आप ?

आधुनिक युग में इन्सान जिस तेज़ी से सफलता की ओर क़दम बड़ा रहा है उसी तेज़ी से उसके मानवीय सम्बंधों में गिरावट आ रही है।तमाम रिश्ते-नाते व दोस्त होते हुए भी वह ख़ुद को कभी कभी बहुत अकेला महसूस करता है।इससे उसकी सोच का दायरा छोटा होता जाता है व समाज में रहते हुए भी अपने आपको दूसरों से अलग पाता है। वह अपने आपको अवांछित व महत्वहीन समझने लगता है।उसके अंदर दुनिया से कटकर अकेले रहने की भावना जागृत होती है।अकेलापन कोई बीमारी नहीं है परंतु बीमारी का लक्षण ज़रूर है।

अकेलापन किसी व्यक्ति के मन में आने वाली वो भावना है जिसमें वह ख़ालीपन व एकांत का अनुभव करता है।अकेलापन परित्याग, अस्वीकृति, निराशा, असुरक्षा, चिन्ता,नैराश्य, व हताशा के परिणामस्वरूप भी हो सकता है।कुछ लोग शर्मीलेपन की वजह से भीड़ से अलग व अकेले रहना पसंद करते हैं।ऐसे लोग किसी से बात करने में भी असहज महसूस करते है और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में लड़खड़ा जाते हैं।बहुत से लोग अनेक बार जीवन में आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों से घबराकर भी अकेले रहने का रास्ता चुनते हैं।ऐसे लोग इंसानों के बीच रहते हुए भी दूसरों से अलग महसूस करते हैं और सामाजिक सम्पर्क में आने से कतराने लगते हैं।हर किसी की ज़िन्दगी में कभी न कभी ऐसा मौक़ा ज़रूर आता है जब वह ख़ुद को अकेला महसूस करता है।जीवन की परेशानियों से अकेले लड़ते हुए उदास होना स्वाभाविक है लेकिन इस जीवन रूपी लड़ाईं में हथियार फेंक कर अपने आपको डिप्रेशन में लाना व मानसिक रोगी बन जाना उचित नहीं है।

अकेलापन सिर्फ़ निराशा उत्पन्न करने वाला ही अहसास नहीं है बल्कि इसके अच्छे पहलू भी हैं।अकेले रहना एक सकारात्मक, सुखद व भावनात्मक रूप से तरोताज़ा करने वाला अनुभव भी हो सकता है।अगर आप अकेलेपन को अपनी क्रिएटिविटि बढ़ाने के लिये व जीवन में कुछ बदलाव लाने के लिये इस्तेमाल कर रहे हैं तो इससे आपके आत्मविश्वास में असीमित बढ़ोतरी होगी।अकेले रहकर आप शांत स्वभाव के मालिक बन जायेंगे और आपके सोचने की शक्ति आपको अलग मुक़ाम पर पहुँचा देगी।अकेले रहकर हम अपनी ज़िन्दगी को एक नयी दिशा प्रदान कर सकते हैं।अकेलापन हमें आत्मनिर्भर बनना व ख़ुद पर विश्वास करना सिखाता है।हिन्दू व बौद्ध धर्म में अकेले रहकर चिन्तन व मनन करने के सैक़ड़ो फ़ायदे बताये गये हैं।अकेले रहने से हम अपने मन को शान्त अवस्था में लाकर चित को नई ऊँचाइयाँ छूने के लिये प्रेरित कर सकते हैं।

इन्सान एक सामाजिक प्राणी है।इन्सान शारीरिक व मानसिक रूप से समाज में रहने के लिये ही बना है।समाज में रहना मनुष्य की ज़रूरत भी है।लेकिन इसके बावजूद वह अलग रहना, पार्टियों से दूरी बनाना, मित्रों से मिलने में आनाकानी करना व परिवार से घुलने मिलने में घबराहट महसूस करता है तो यह कोई असामान्य बात नहीं है।कभी कभी प्रतिकूल परिस्थितियाँ भी व्यक्ति को सामाजिक मेलजोल का दायरा बढ़ाने से रोकती हैं।हर व्यक्ति स्वभाव से भिन्न होता है।ऐसे व्यक्ति के सामाजिक दायरे को बढ़ाकर परिवार व दोस्तों की मदद से उसके आत्मविश्वास व आत्मसम्मान की रक्षा की जा सकती है।अगर इंसान अपने जीवन के महत्व को समझता है व अपने जीवन के एक एक क्षण का भरपूर आनंद उठाकर अपने प्रिय कार्य को करता है,तभी यह इंसान व इंसानियत की जीत होगी।

2 Replies to “LONELINESS – अकेलेपन से कैसे बचेंगे आप ?”

  1. हर दूसरा इंसान अवसाद ग्रस्त होता जा रहा है।वर्तमान में जीवन स्तर में सुधार ने हमें सर्व सुख सुविधा सम्पन्न जीवन जीने की आदत डाल दी है ऐसे में हर व्यक्ति प्रतिस्पर्धा में शामिल है ।किसी भी पैमाने पर खुद के पीछे रह जाने पर उनमें हीनभावना अवसाद विकसित हो जा रहा है।

    1. अपने बहुमूल्य विचार रखने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद

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