LIFE – जीवन एक खोज

LIFE – जीवन एक खोज

जीवन एक खोज

एक इंसान की ज़िंदगी जहाँ ख़ुशीयो,उमंगो व उपलब्ध्दियो से भरी होती है वहीं दूसरी ओर अनेक प्रकार की कठिनाइयाँ,मुसीबतें व दुखों का अथाह समुन्दर उसके जीवन में ख़लल डालता रहता है। जीवन रूपी इस यात्रा में हम अनेक ऐसी चुनौतीयो का सामना करते है जो हमारे साहस,कमजोरियों व विश्वास की परीक्षा लेतीं हैं।कुछ लोग इन कठिनाईयो से टूटकर हौसला हार जाते हैं और बेहतर जीवन की इच्छा छोड़ देते है।वहीं दूसरी ओर कुछ लोग आने वाली हर मुसीबत का डटकर सामना करते हैं।और सफलता के नये आयाम स्थापित करते हैं। व्यक्ति का जीवन हमेशा चुनौतीपूर्ण व बाधाओं से परिपूर्ण होना चाहिए।यदि हम अपना सब कुछ झोंककर इन चुनौतीयो से निपटने के लिये जी-जान से जुटते हैं तो स्वाभाविक रूप से कुछ ग़लतियाँ करते हैं।जीवन में यही ग़लतियाँ हमें बहुत आगे तक ले जाती हैं। इन ग़लतियों से सीखकर हम अपना भविष्य सुंदर व सुरक्षित बना सकते हैं।ग़लतियाँ ही हमारी सबसे बड़ी शिक्षक हैं।दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसने कभी ग़लती नहीं की हो।परंतु अपनी इन्ही ग़लतियों से सीखकर बड़ा इंसान बनने वाले लाखों लोग हैं।

जीवन एक खोज

जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।ख़ुशियाँ व कठिनाइयाँ इस जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।इस आपाधापी में जीवन हमेशा गतिमान रहता है।जीवन की इस लम्बी यात्रा में हमें ख़ुशीयो को खोजने की प्रक्रिया हमेशा जारी रखनी चाहिये। ज़िन्दगी में ख़ुशीयो की खोज व बेहतर जीवन की तलाश के लिए ब्राज़ीली लेखिका मार्था मेडिएरोस ने एक कालजयी रचना लिखी है। दुनिया की सबसे बेहतरीन माने जाने वाली इस कविता में पूरा जीवन दर्शन उढेलकर रख दिया है। You Start Dying Slowly नामक इस कविता में जीवन जीने की कला को पुरज़ोर अन्दाज़ में पेश किया गया है।

जीवन एक खोज
MARTHA MEDEIROS

YOU START DYING SLOWLY. आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,अगर आप – – – – करते नहीं कोई यात्रा ,पढ़ते नहीं कोई किताब,सुनते नहीं जीवन की ध्वनियां,करते नहीं किसी की तारीफ़ । – आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,जब आप – – – – मार डालते हैं अपना स्वाभिमान।नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की। आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,अगर आप – – – – बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,चलते हैं रोज़ उन्ही रोज़ वाले रास्तों पर,नहीं बदलते अपना दैनिक नियम व्यवहार,नहीं पहनते हैं अलग अलग रंग या,आप नहीं बात करते उनसे,जो हैं अजनबी- अनजान आप धीरे धीरे मरने लगते है,अगर आप – – – – नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को,और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें,और करती तेज़ आपकी धड़कनो को। आप धीरे धीरे मरने लगते हैं,अगर आप – – – – नहीं बदल सकते हो अपनी ज़िंदगी को,जब हो आप असंतुष्ट अपने काम, और परिणाम से, अगर आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हो निश्चित को, अगर आप नहीं करते हो पीछा किसी स्वप्न का, अगर आप नहीं देते इजाज़त ख़ुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की । “तब आप धीरे धीरे मरने लगते हैं” (साभार- मार्था मेडिएरोस ) धन्यवाद व जय हिन्द


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