IMPORTANCE OF RELTIONSHIPS – रिश्तों की अहमियत

IMPORTANCE OF RELTIONSHIPS – रिश्तों की अहमियत

सांसारिक रिश्ते हमारे पूर्वजों की धरोहर है।इन्हें बड़े ही प्यार,त्याग व संस्कारों से सींचा गया है।रिश्तों के बिना ज़िन्दगी अधूरी व नीरस है।ज़िन्दगी में ख़ुशहाली व समृद्धि अच्छे रिश्तों की बुनियाद पर ही टिकी हुई है।अपनों के साथ अच्छे सम्बन्ध जहाँ हमें जीवन की ऊँचाइयों पर पहुँचा देते हैं वहीं बुरे रिश्ते हमें अन्दर से खोखला व असुरक्षित महसूस करवाते हैं।रिश्तों को बनाना तो आसान हैं,लेकिन निभाना बहुत मुश्किल।हर रिश्ता आदर, सम्मान व समय का हक़दार होता है लेकिन ज़िन्दगी की बढ़ती रफ़्तार ने रिश्तों की गर्मजोशी पर लगाम लगा दी है।अपनापन धीरे धीरे ख़त्म हो रहा है।हर व्यक्ति अपने आप में व्यस्त है।रिश्तों की जगह मोबाइल,लैपटॉप ने ले ली है और छोटे परिवारों की बढ़ती महत्वकांक्षा ने भी आदमी को सिर्फ़ अपने तक सिमटने पर मजबूर कर दिया है।

रिश्तों की अहमियत

रिश्तों की अहमियत को समझें

रिश्तों को बड़े ही प्यार व अपनेपन की भावना से आगे बढ़ाया जाता है।झुकने वाले लोग कमज़ोर नहीं होते हैं बस उनमें रिश्तों को निभाने की चाहत दूसरों से ज्यादा होती है।जिस रिश्ते में बार बार सफ़ाई देनी पड़े,वो रिश्ते कभी भी गहरे नहीं हो सकते हैं।आपसी रिश्ते जब मज़बूत होते हैं तो बिना कहे ही महसूस होते हैं।आधे अधूरे रिश्ते हमें ज़िन्दगी की उस मँझधार में फ़ँसा देते हैं जो हमें न डूबने देती है और न ही बचने का कोई मौक़ा देती है।अतः रिश्तों को खुले दिल से स्वीकार करना चाहिये। रिश्ते बोझ नहीं अपितु सहारा होते हैं इसलिए जहाँ तक सम्भव हो,इन्हें बचाने व सँवारने की भरपूर कोशिश करनी चाहिये।ऐसे रिश्ते हमारे बेहतर सम्बन्धों का आधार होते हैं।इन्ही के साथ जीवन में एकाकीपन ख़त्म कर जीवन को ख़ुशहाल व समृद्ध बनाया जा सकता है।

IMPORTANCE OF RELTIONSHIPS - रिश्तों की अहमियत

रिश्तों को निभाने की ज़िम्मेवारी दोनों पक्षों पर —-

एकतरफ़ा व सम्मान के बिना रिश्ता कभी भी चल नहीं सकता है अतः रिश्तों में परस्पर सम्मान मूलभूत कारक है।रिश्तों को निभाने की ज़िम्मेदारी दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होती है।अगर एक पक्ष को दूसरे पक्ष की अहमियत का अहसास नहीं होता है तो ऐसे रिश्ते से अलग हो जाना ही बेहतर है।रिश्तों में गर्माहट लाने के लिये एक दूसरे की भावनाओं व ज़रूरतों को समझना बहुत ज़रूरी है।आपसी विश्वास व त्याग की राह पर चलकर ही रिश्तों को ख़त्म होने से बचाया जा सकता है। रिश्तों में खटास होने पर विश्वास बहाली के तमाम उपायों को अपनाया जाना चाहिये क्योंकि एक बार रिश्तों में अविश्वास की भावना आ जाये तो रिश्तों को संजो कर रखना बड़ा कठिन हो जाता है।जीवन में हर रिश्ते को सम्मान व समय दीजिये क्योंकि यही हमारी ज़िन्दगी की जमा पूँजी है और हमारे जीवन का आधार है।

IMPORTANCE OF RELTIONSHIPS - रिश्तों की अहमियत

समाज में रिश्तों का महत्व —

बच्चों में संस्कारों की नींव माता पिता द्वारा ही रखी जाती है।अगर माता पिता ही आपसी रिश्तों को महत्व नहीं देते हैं तो बच्चों से अपेक्षा रखना बेमानी है।अतः बचपन से ही बच्चों को रिश्तों का महत्व ज़रूर बताना चाहिये।घर की नींव जितनी मज़बूत होगी,घर उतना ही सुरक्षित होगा।कुछ लोगों को रिश्तों की समझ नहीं होती है इसलिए बाहर की दुनिया में अपनापन ढूँढते हैं।माँ बाप, जीवन साथी, दोस्त, बच्चों के साथ अपने रिश्तों की क़ीमत को पहचानिये और जीवन की इस अनमोल विरासत को सम्भाल कर रखिये।हर रिश्ता आपका थोड़ा समय, थोड़ा सम्मान व थोड़े से प्रेम की अभिलाषा रखता है।उसे यूँ ही मत निराश कीजिये। इतने कठोर व मतलबी न बनें की आप उन्हें खो बैठें।दिलों की गहराई में उतरिये और प्रेम से बने पुराने सदाबहार रिश्तों को पहचानिये। यही रिश्ते आपके सबसे बुरे वक़्त में साथ खड़े रहकर हमें फिर से जीवन जीने का हौसला प्रदान करते हैं और हमें फिर से सफल व ऊर्जावान बनाये रखने के लिये जी जान लगा देते हैं।ऐसे रिश्तों को समेट कर रखने में हमें अपने आप पर गर्व होना चाहिये। धन्यवाद व जय हिन्द

This Post Has One Comment

  1. Deepak Sharma

    Very well written. You beautifully captured the essence of how important relationships are.

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