HUNGER – भूखमरी से निजात कब ?

HUNGER – भूखमरी से निजात कब ?

दुनिया भर में इन्सान ने अपनी तरक़्क़ी व ख़ुशहाली के नए आयाम स्थापित किये हैं।जहाँ एक तरफ़ गगन चूमती इमारतें, शानदार टेक्नोलॉजी और दौलत के अथाह भण्डार से दुनिया की आँखे चौंधिया रही है।वही दूसरी तरफ़ इसी दुनिया में एक वर्ग ऐसा भी है,जो दो वक़्त की रोटी खाने के लिये अपने परिवार के साथ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। भूख से बिलबिलाते इस वर्ग के पास खाने का जुगाड़ करने का कोई सहारा नहीं है।जैसे जैसे दुनिया मे अमीरी बढ़ रही है, वैसे वैसे भूख से त्रस्त जनता बढ़ती जा रही है।आख़िर दुनिया में इतना असन्तुलन क्यों बढ़ रहा है,अमीर-ग़रीब के बीच की खाई क्यों चौड़ी होती जा रही है।इसके लिये कौन ज़िम्मेवार है,जानते हैं।

HUNGER - भूखमरी से निजात कब ?

जब से इस सृष्टि का निर्माण हुआ है, दुनिया में व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का आकलन करने व अपना प्रभुत्व ज़माने के लिये जाति, लिंग व मजहब की दीवारें खींच दी गयी।उच्च वर्ग को समाज में बदलाव लाने व नेतृत्व करने के लिये स्वयंभू मसीहा के रूप में स्थापित किया गया और उन्हें ही समाज में हस्तक्षेप करने व अपना फ़ैसला थोपने का अधिकार भी दिया गया।वक़्त बदलने के साथ साथ ये दीवारें ऊँची होती गयी और इनमें इतना अंतर पैदा हो गया की समाज में अमीर व ग़रीब की अवधारणा प्रतिपादित हो गयी।इससे अमीर-ग़रीब में असन्तुलन ख़तरनाक ढंग से बढ़ने लगा और ग़रीब वर्ग दो वक़्त की रोटी जुटाने के लिये जीवन संघर्ष में पिछड़ने लगा।आज हम अपने आसपास नज़र दौड़ायें तो बड़ी विस्फोटक स्थिति नज़र आती है।ग़रीब और विकासशील देशों में तो स्थिति और भी भयावह दिखाईं देती है।दुनिया भर में करोड़ों ग़रीबों को दो वक़्त के खाने के लिये आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

HUNGER - भूखमरी से निजात कब ?

ग़रीब को अगर आज भूख से लड़ना पड़ रहा है तो इसके कई अन्य कारण भी समय समय पर अवतरित होते रहते हैं।जिनमें प्राकृतिक आपदाएँ, अकाल, भुखमरी, विस्थापन और जनकल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच न पाना मुख्य कारण है। साधनों के असमान वितरण व बिचौलियों के आगमन से भी उनके हाथ आज भी ख़ाली हैं।आज पूरे विश्व में लॉकडाउन के चलते भी कमज़ोर वर्गों को खाने की भयंकर समस्या पैदा हो गयी है। करोड़ों लोगों के लिये खाने का इंतज़ाम करने के लिये सरकारों को पसीने छूट रहे हैं।इसके लिये स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जा रही है।अग़र सरकारों ने भूख का स्थायी इंतज़ाम किया होता तो आज उन्हें इतना बेबस महसूस न होता।

HUNGER - भूखमरी से निजात कब ?

दुनिया में जब तक अमीरी और ग़रीबी के बीच की खाई नहीं मिटेगी तब तक भूख के ख़िलाफ़ जंग ऐसे ही जारी रहेगी।इस तरह के गम्भीर व मर्मस्पर्शी मुद्दे सेमिनारों व राजनैतिक सम्मेलनों के घोषणा पत्रों तक सिमट कर रह गये हैं।अगर आज इस भीषण समस्या पर तुरंत व निर्णायक क़दम न उठाये गये तो लाखों ग़रीब लोग असमय ही भूख से मर जायेंगे। जब तक सरकारें ग़रीब को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रहेंगीं और ग़रीब वोटर भी सरकार से अपने हक़ के लिये कोई सवाल नहीं पूछता, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।अतः पूरी दुनिया को यह समझना होगा कि मिल-जुल कर ही इस मानवीय समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।भूख से एक ग़रीब की मौत पूरी इंसानियत की मौत होगी। धन्यवाद व जय हिन्द

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