GREETINGS – अभिवादन ( दिलों को जोड़ने की कला )

GREETINGS – अभिवादन ( दिलों को जोड़ने की कला )

प्राचीन काल से ही पूरे विश्व में मानव समाज में एक दूसरे से मिलने पर अपनी उपस्थिति को अवगत कराने व दूसरे की उपस्थिति को स्वीकारने के लिये कुछ शब्दों या हाव भाव का प्रयोग किया जाता है और कई बार दोनों का संयुक्त रूप में प्रयोग किया जाता है। मानव की इसी क्रिया को अभिवादन का नाम दिया गया है।जहाँ पश्चिम समाज में हैल्लो, हाय, good morning, good evening,आपसे मिलकर ख़ुशी हुई,आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा, जैसे वाक्य प्रयोग में लिए जाते हैं वही भारत में नमस्ते व मुस्लिम समाज में अससलामुअलिकम जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।अगर आप किसी भी वाक्य की शुरुआत इनके साथ करते हैं तो आपकी पूरी बात को बहुत ही प्यार व ध्यानपूर्वक सुना जायेगा।शारीरिक हाव भाव व इशारों से ही सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित किया जा सकता है।अतः हम कह सकते हैं की अभिवादन दिलों को जीतने की भी कला है।

GREETINGS - अभिवादन ( दिलों को जोड़ने की कला )

दुनिया भर में लोगों का अभिवादन व अभिनंदन करने के लिये अलग अलग तरीक़ों का इस्तेमाल किया जाता है।अभिवादन के यह रूप सामाजिक शिष्टाचार व लोगों के सम्बन्धों द्वारा निर्धारित होते हैं।इनमें सबसे प्रमुख हाथ मिलाना है,जिसका पूरी दुनिया में व्यापक रूप से प्रयोग होता है।अभिवादन के कुछ अन्य तरीक़े पश्चिमी समाज में प्रचलित हैं जिनमें fist Bump ( अपनी बंद मुट्ठी को दूसरे की बंद मुट्ठी से टकराना ), व High-five ( जिसमें अपने एक हाथ को सिर की ऊँचाई तक उठा कर अपने पंजे को दूसरे के पंजे से टकराना ) अति प्रचलित है।इसके अलावा भी Hug करना ( एक दूसरे से गले मिलना ) भी समाज में अभिवादन का एक बढ़िया तरीक़ा है। दुनिया की कई भाषाओं व संस्कृतियों में एक ही शब्द या क्रिया को अभिवादन व विदाई दोनों में प्रयुक्त किया जाता है जिनमें अंग्रेज़ी में good day, पंजाबी में सत श्री अकाल, अरबी में अससलामुअलिकम, हिन्दी में नमस्ते, हिब्रु में शालोम, व इटालवी में सीआओ शामिल है।

GREETINGS - अभिवादन ( दिलों को जोड़ने की कला )

भारतीय संस्कृति व सभ्यता में अभिवादन को व्यापक रूप में प्रचारित व प्रसारित किया गया है।जिस देश में पहाड़ों,नदियों,पेड़-पोधों व गाय की पूजा तक को पूजनीय माना गया है और उनका हाथ जोड़कर अभिवादन किया जाता है, वहाँ एक मानव का भी पूरे सम्मान से हाथ जोड़कर अभिवादन किया जाता है।भारत में हाथ जोड़कर नमस्ते करने से कहीं ज्यादा चरण स्पर्श कर अपने से बड़े या पूजनीय व्यक्ति का सम्मान किया जाता है।भारतीय ग्रंथो में भी अभिवादन करने वाले को चिरंजीवी भव का आशीर्वाद दिया गया है।भारत की इन्ही विशेषताओं के कारण आज नमस्ते को पूरी दुनिया दिल खोलकर अपना रही है। धन्यवाद व जय हिन्द

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