EID UL-FITR – ईद उल फितर

EID UL-FITR – ईद उल फितर

जब पूरी दुनिया में इंसानियत तार तार हो रही हो, धर्म के नाम पर इंसान एक दूसरे के दुश्मन बन जायें और अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिये दूसरे धर्म को नीचा दिखाया जाये तो ऐसे में ईद ही हमें आपसी दुश्मनी को ख़त्म कर प्यार बाँटना सिखा सकती है। ईद मूल रूप से भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्यौहार है।इस त्यौहार का मक़सद ही एक दूसरे के दिल में प्यार जगाना व नफ़रत का ख़ात्मा करना है।इसमें खुदा से सभी की सुख शांति व बरकत के लिये दुआऐं माँगी जाती है।

EID UL-FITR - ईद उल-फितर

इस्लामिक कैलेण्डर में नौवें महीने को सबसे पवित्र माना जाता है।इस पवित्र महीने को ही रमज़ान का महीना कहा जाता है।इस महीने में पूरे दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अल्लाह की इबादत करते हुए,बिना कुछ खाये,रोजे का पालन किया जाता है।सूर्यास्त के बाद नमाज़ पढ़कर रोज़ा खोला जाता है।रोज़ा खोलने को इफ़्तार भी कहा जाता है।एक महीने तक हर दिन पूरे पाँच वक़्त की नमाज़ के साथ इसका पूरे दिल से पालन किया जाता है। क़ुरान के अनुसार इंसान को भूखा प्यासा रहकर ही किसी लालच से दूर रहने रहने व सही रास्ते पर चलने की हिम्मत मिलती है।दसवें महीने में शव्वाल की पहली रात ईद की रात होती है।इस चाँद रात को देखे जाने के बाद ही ईद उल-फितर का ऐलान किया जाता है।

EID UL-FITR - ईद उल-फितर

पहली ईद सन 624 ईसवी में पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद ने जंग-ए- बदर के बाद मनाई थी।पैग़म्बर मोहम्मद ने बदर के युद्ध में विजय प्राप्त की थी।उनके विजयी होने की ख़ुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है।युद्ध में जीत के बाद मिठाई के रूप में प्रशाद का वितरण किया गया था।अतः इसे मीठी ईद के रूप में भी जाना जाता है। ईद को दुनिया भर के मुसलमान बड़े हर्ष उल्लास से मनाते हैं।इस दिन लोग नये कपड़े पहन कर नमाज़ अदा करने जाते हैं और नमाज़ अदा करने से पहले हर मुसलमान का फ़र्ज़ है,दान या ज़कात देना।इस पवित्र दिन दान करने से उसका दोगुना फल प्राप्त होता है।नमाज़ के बाद लोग पुरानी दुश्मनी भुलाकर एक दूसरे के गले मिलते हैं।ईद के दिन बड़े अपने से छोटों को उपहार के रूप में ईदी प्रदान करते हैं।ईद का मतलब ही ख़ुशी मनाना है।

EID UL-FITR - ईद उल-फितर

ईद का त्यौहार हमें यह अहसास कराता है की पूरी मानव जाति एक है और इंसानियत ही उसका मजहब है।पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद के अनुसार रमज़ान के पूरे महीने में भूख प्यास बर्दाश्त करने के बाद ईद की ख़ुशी इस बात की मिसाल है की ज़िंदगी में मुसीबतों पर सब्र करने के बाद कभी न कभी ख़ुशियाँ अवश्य मिलती हैं।ईद आपसी रंजिशों को मिटाकर एक दूसरे की ख़ुशियाँ को बाँटने व ग़लतियों को माफ़ कर अपने दुश्मनों को गले लगाने का त्यौहार है।अगर आप किसी को दिल से माफ़ करेंगे तो ही अल्लाह के यहाँ साबित होगा की आपने रमज़ान में सब्र करना सीख लिया है।ईद इस्लाम धर्म की परम्पराओं का आईना है।ईद जैसा त्यौहार ही हमें यह अहसास करा सकता है की हमें नफ़रतों को मिटाकर एक दूसरे के दिल में प्यार बढ़ाना होगा इसी में पूरी मानव जाति का कल्याण निहित है। धन्यवाद व जय हिन्द

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