DREAMS – अपने सपनों का पीछा कैसे करें ?

इन्सान हर दिन एक नया सपना देखता है और अपने हर सपने को हक़ीक़त में बदलना चाहता है।बन्द आँखों से देखे जाने वाले सपनों की तुलना में,खुली आँखों से देखे जाने वाले सपनों में सच्चाई अधिक होती है।ऐसे सपनों को न केवल सच्चाई के धरातल पर उतारा जा सकता है बल्कि उन तमाम ऊँचाइयों को भी प्राप्त किया जा सकता है जो हमारे लिये अब तक मृग मरीचिका साबित होती आयी हैं।किसी सपने का सच होना बड़ा ख़ूबसूरत होता है।योजनाबद्द तरीक़े से ही हम अपने तमाम सपनों को उसके अंजाम तक पहुँचा सकते हैं।सपनों को हक़ीक़त में बदलने के लिये जहाँ कड़ी मेहनत,लगन व दूरदृष्टि की आवश्यकता होती है वहीं किसी चीज़ को पाने का विश्वास भी उसे मुक़ाम तक पहुँचाने में अहम भूमिका अदा करता है।छोटे छोटे क़दमों से भी दुनिया नापी जा सकती है बशर्ते आपमें हौसला व जुनून बरक़रार रहे।

सपनों को हक़ीक़त में कैसे बदलें

दुनिया में कोई भी कार्य तब तक नामुमकिन लगता है,जब तक उसकी शुरुआत नहीं हो जाती है।शुरुआत करते ही चीज़ें धीरे धीरे बदलने लगती हैं।अपने सपनों को सच करने के लिये एक विस्तृत प्लानिंग की आवश्यकता होती है।जैसे जैसे हम इस पर कार्य करते हैं,सपना हक़ीक़त में बदलना शुरू हो जाता है।सबसे पहले हमें अपने पर पूरा विश्वास होना चाहिये। विश्वास ही वह राह है जो हमें अपने सपने की ओर ले कर जाती है।विश्वास के साथ उठाया गया हर क़दम हमें ख़ुद पर यक़ीन करने का मौक़ा प्रदान करता है।अतः पूरे विश्वास के साथ अपने सपने को चरणबद्ध तरीक़े से अपने जीवन में उतारिये और उसके प्रभाव व दुष्प्रभाव को सामने रखकर योजना बनाइये।योजना के हर चरण को पूरा करने के लिये तमाम साधन व पर्याप्त समय आपके पास अवश्य होना होना चाहिये।हर छोटी छोटी चीज़ पर बारीकी से ध्यान लगायें और अपना सारा ध्यान सिर्फ़ इसी पर केन्द्रित कर दें।अपने आपको शान्त व ऊर्जावान बनाये रखें।आपके काम के बारे में आपसे बेहतर कोई नहीं जानता,इसलिए दूसरों के हस्तक्षेप को अनसुना कर दीजिये।समय समय पर अपने प्रियजनों को इसकी प्रगति से अवगत कराते रहें और उनके अच्छे विचारों को अपने सपने में जगह दीजिये।जितना आप आगे बढ़ेंगे,मुश्किलें पीछे छूटती जायेंगी।एक दिन आप अपने सपने को सच होता देखेंगे और अपनी इस कामयाबी पर इतराने का आपको पूरा हक़ होगा।

कर्म करते रहना ही ज़िन्दगी है

जीवन में सफलता पाने का मूल मंत्र है,कर्मशील होना।कर्म करते रहना ही ज़िन्दगी है।असफलता के डर से किसी कार्य को न करना फ़ेल होने के समान है।ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिये हमेशा क़दम बढ़ाकर शुरुआत तो करनी ही होगी।सही वक़्त का इन्तज़ार करते करते बुरा वक़्त भी शुरू हो सकता है,अतः वक़्त व मौक़ों को खोजने की ज़रूरत है।वह हमारे आसपास ही बिखरें पड़े हैं बस उन्हें सहेजने व अवसर में बदलने की ज़रूरत है।शुरुआत करने के लिये हर वक़्त व परिस्थितियाँ सही होती है,बस विश्वास के साथ आगे बढ़ने की ज़रूरत है।छोटे छोटे क़दम उठाकर भी हम बड़ी बड़ी मुश्किलों को हरा सकते हैं और अपने सपने को सच कर मंज़िल को पा सकते हैं।

रिश्तों की अहमियत को समझें

ज़िन्दगी की भागदौड़ व सफलता के नशे में चूर हम उन तमाम लोगों को भूल जाते हैं जिन्होंने हमारी सफलता में अहम योगदान दिया है।जिनके सहयोग से ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पायें हैं।सफलता कभी इतनी बड़ी नहीं होनी चाहिये कि हम रिश्तों की अहमियत को भूल जायें और रिश्ते नाते पीछे छोड़ कर आगे बढ़ जायें।अपनों का साथ पाकर ही हम दुनिया में हर मुक़ाम हासिल कर सकते हैं।अतः रिश्तों का निर्धारण भी हमारे सपनों में अहम भूमिका निभाता है।सफलता तो आनी-जानी है,किन्तु अपनों का साथ छूट गया तो कामयाबी व शौहरत बेमानी लगती है।अतः ख़ुद को दुनिया का सबसे ख़ुशहाल व सुखी इन्सान माने और ईश्वर को धन्यवाद दें, जिसकी बदौलत आप सुखी, समृद्ध व समाज में प्रतिष्ठित हैं। धन्यवाद व जय हिन्द

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