DONALD TRUMP – क्या दोबारा राष्ट्रपति बन पायेंगे ?

दुनिया के सबसे पुराने लोकतन्त्र अमेरिका में हर चार साल बाद राष्ट्रपति का चुनाव किया जाता है।अमेरिका में जन्म लेने वाला हर अमेरिकी नागरिक,जिसकी आयु कम से कम 35 वर्ष हो और वह लगातार 14 वर्षों से अमेरिका में रह रहा हो,राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकता है। लोकतन्त्र के इस महापर्व में जहाँ अमेरिकी जनता बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती है वहीं दुनिया की निगाहें भी इस ओर टिकी रहती हैं की दुनिया के सबसे ताक़तवर मुल्क की कमान किसके हाथ में आएगी।अमेरिका में भले ही बहुदलीय प्रणाली हो किन्तु राष्ट्रपति का चुनाव मुख्यतः डेमोक्रेटिक व रिपब्लिकन पार्टियों के मध्य ही होता है।अमेरिकी चुनाव एक लम्बी व थका देने वाली प्रक्रिया है।पूरे एक वर्ष में ( जनवरी से अगले वर्ष की जनवरी तक ) यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है। चुनावी साल में नवम्बर महीने के पहले मंगलवार को मतदान होता है। इसे सुपर टयूस-डे भी कहा जाता है। 20 जनवरी को इनोग्रेशन डे पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शपथ ग्रहण करते हैं।कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।

डॉनल्ड ट्रम्प की बढ़ती परेशानियाँ —

कोरोना काल ने दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक व सैन्य शक्ति की अवधारणा को बहुत बड़ी चोट पहुँचायी है।कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों से ट्रम्प की ख़ुद की छवि भी बहुत धूमिल हुई है।समय पर क़दम न उठाने व देश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने भी आग में घी डालने का काम किया है।अगर उचित समय पर लॉकडाउन की घोषणा कर दी जाती और सोशल डिस्टन्सिंग के नियमों का कढ़ाई से पालन किया जाता तो कोरोना से होने वाली मौतों को बहुत हद तक टाला जा सकता था।फिर उसके बाद लम्बे लॉकडाउन ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुँचा दिया है।आज अमेरिका में कोरोना से जहाँ 1 लाख से अधिक मौतें हो चुकी हैं और 17 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से लड़ रहे हैं।वहीं पूरे अमेरिका में 3.86 करोड़ लोग बेरोज़गारी भत्ते के लिये रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।बेरोज़गारी दर 80 साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है।विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की यह स्थिति कल्पना से परे है।अमेरिकी जनता व अर्थशास्त्री इसके लिये ट्रम्प की लचर नीतियों को ज़िम्मेवार ठहरा रहें हैं।

डॉनल्ड ट्रम्प के बेतुके बयान

कोरोना संक्रमण से होने वाले नुक़सान के साथ साथ ट्रम्प के अजीबोग़रीब व बेतुके बयान भी उनकी छवि को बहुत नुक़सान पहुँचा रहे हैं।बयान देकर पलट जाना उनकी पुरानी आदत रही है। अमेरिकी जनता को सैनिटाईज़र का इंजेक्शन लगाने की सलाह देने व हाईड्रोक्सीक्लोरोक्विन खाने का बयान देकर मुसीबत में फँसें ट्रम्प ने बाद में अपने कहे से पल्ला झाड़ लिया।डॉक्टर के अनुसार इससे स्वास्थ्य को गम्भीर ख़तरा पैदा हो सकता है।इसके अलावा ट्रम्प का यह बयान सोच से परे है की देश में संक्रमण का ज्यादा होना अच्छी बात है,यह हमारे लिये सम्मान के तमग़े जैसा है।जब अमेरिका में संक्रमण अपने चरम पर है, ट्रम्प वर्जीनिया के गोल्फ़ कोर्स में बिना मास्क गोल्फ़ खेलते नज़र आए।लोग जहाँ गोल्फ़ कोर्स के बाहर ट्रम्प के विरोध में बैनर दिखा रहे हैं वहीं कुछ लोग व्हाइट हाउस के बाहर बॉडी बैग रखकर अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं।कई ज़गह जनता सड़कों पर उतर आयी है और सोशल मीडिया पर ट्रम्प के ख़िलाफ़ ज़ोरदार अभियान चलाया जा रहा है।इन चौतरफ़ा हमलों से घिरे ट्रम्प इसे विपक्षी पार्टियों द्वारा चलाया गया अभियान बताकर इसे सिरे से ख़ारिज कर रहे हैं।

डॉनल्ड ट्रम्प कैसे जीतेंगे चुनाव

आगामी राष्ट्रपति चुनावों में अगर कोई एक मुद्दा ट्रम्प को चुनाव जीता सकता है तो वह है राष्ट्रवाद व सिर्फ़ राष्ट्रवाद। ट्रम्प दक्षिपंथी विचारधारा के समर्थक हैं।अपने आचरण व व्यवहार से ट्रम्प दक्षिणपंथी विचारधारा का ही प्रतिनिधित्व करते हैं।अमेरिका में आने वाले प्रवासियों पर उनके कड़े बयान हमेशा सुर्ख़ियो में छाए रहते हैं। नौकरियों में कोई भी विदेशी नागरिक अमेरिकियों की जगह न ले पाए इसलिए ट्रम्प ने एच-1बी वीज़ा में भारी कटौती कर दी है।अमेरिकी संसद में हाल ही में एच-1बी वीज़ा क़ानूनों में बदलाव को लेकर एक बिल पेश किया गया है।इस बिल का मक़सद अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा व प्रवासियों से बेहतर सैलरी सुनिश्चित करना है।ट्रम्प ने अमेरिकी नागरिकों के लिए एक ओर क़दम उठाते हुए आव्रजन नीतियों को कठोर बनाकर इमिग्रेशन पर तत्काल रूप से पाबन्दी लगा दी है।कोरोना काल में ट्रम्प का ग़ुस्सा सर्वाधिक जिस देश पर टूटा है,वह चीन है।ट्रम्प अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही चीन को निशाने पर लेते आयें हैं। चीन को पूरी दुनिया में कोरोना फैलाने का दोषी मानते हुए ट्रम्प ने उसके ख़िलाफ़ अभूतपूर्व कार्यवाही शुरू कर दी है।राष्ट्रपति ट्रम्प के क़रीबी नौ सांसदो ने चीन पर प्रतिबंध लगाने के लिये संसद में एक बिल पेश किया है जिसके पास हो जाने पर अमेरिकी प्रशासन चीन की सम्पत्तियाँ सील कर सकेगा, चीन पर यात्रा प्रतिबन्ध लगेगा, चीनी नागरिकों को वीज़ा रद्द होगा व चीन की कम्पनियाँ शेयर बाज़ार से बाहर कर दी जायेंगी। इस सारी क़वायद में ट्रम्प का मक़सद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को उबारना, अमेरिकी कम्पनियों को चीन से वापिस अमेरिका लाना व स्थानीय कम्पनियों में लोकल व्यक्ति को प्राथमिकता देना शामिल है।इस तरह अमेरिका फ़र्स्ट की नीति अपनाकर व राष्ट्रवाद की प्रबल भावना को हाईलाइट कर ट्रम्प चुनाव में सफलता पाने की मुहिम में जुटे हैं।पिछले चुनावों में भी ट्रम्प ने तमाम सर्वेक्षणों में पिछड़ने के बावजूद विजय पायी थी और यही उनकी ताक़त है। धन्यवाद व जय हिन्द

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