CHINA – दुनिया का विरोध क्या झेल पाएगा चीन ?

CHINA – दुनिया का विरोध क्या झेल पाएगा चीन ?

सन 2040 तक अमेरिका को पीछे धकेल कर विश्व की एकमात्र महाशक्ति बनने के चीन के सपने को कोरोना वायरस ने तोड़ कर रख दिया है और दुनिया की तीसरी महाशक्ति को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।पूरी दुनिया में कोरोना के संक्रमण को चीन की साज़िश बताने व उसकी आड़ में अरबों का बिजनेस करने के चीन के प्लान के ख़िलाफ़ बहुत से देशों ने कमर कस ली है और इसमें प्रतिदिन नए देश शामिल हो रहे है। दरअसल कोरोना के ज़रिये पूरे विश्व में अपना प्रभाव बढ़ाने व मेडिकल सप्लाई के बदले अरबों कमाने के चीन के प्लान को दुनिया ने भाँप लिया और चीन की लानत मलानत शुरू कर दी गयी।इसी के साथ चीन की पूर्व में अपनाई गयी साम्राज्यवादी व विस्तारवादी नीतियों व कमज़ोर देशों पर आर्थिक नियंत्रण की बात भी खुलकर सामने आने से ग़रीब देशों में चीन के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त ग़ुस्सा है और वह बढ़ चढ़ कर चीन के ख़िलाफ़ बयान दे रहें हैं।आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

CHINA - दुनिया का विरोध क्या झेल पाएगा चीन ?

दुनिया पर अपना दबदबा बनाने के लिये चीन ने 2015 में वन बेल्ट वन रोड के नाम से एक आर्थिक गलियारे की शुरुआत की थी। यह आर्थिक गलियारा पूरी दुनिया की 60 फ़ीसदी या 4.4 अरब जनसंख्या को सड़क व रेल मार्ग के द्वारा एक दूसरे को जोड़ता है। चीन ने इस आर्थिक गलियारे के बीच में आने वाले ग़रीब व विकासशील देशों को सुनहरी सपने दिखाये और उनके उत्पाद को पूरी दुनिया तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया।इन ग़रीब देशों को वित्तीय मदद या ऋण के नाम पर इनसे अनैतिक समझोते किये गये और इस ऋण को समय पर न चुका पाने पर चीन उस क्षेत्र,बन्दरगाह या शहर को अपने क़ब्ज़े में कर लेता है। समय पर लोन न चुकाने पर चीन ने श्रीलंका के हम्बंनटोटा बन्दरगाह व कीनिया के मुख्य पोर्ट को अपने क़ब्ज़े में कर लिया है। इसके अलावा भी चीन ने विभिन्न देशों की कम्पनियों में अधिकांश हिस्सा ख़रीद कर उस देश के आंतरिक मामलों में दख़ल देना शुरू कर दिया है।चीन की इन्ही विस्तारवादी नीतियों ने पूरे विश्व की नींद उड़ा रखी थी। लेकिन चीन जिस कोरोना के बदले अपनी दवाइयों, मेडिकल उपकरणों व मदद के भरोसे पूरी दुनिया पर छाने की कोशिश कर रहा था वही उसके लिये मृग मरीचिका साबित हुई है।दान में मिले मास्क,पीपीइ सूट व अन्य उपकरणों को उसने दानदाता देश को ही लाखों डॉलर में बेच दिया।चीन द्वारा कई देशों को भेजी गयी टेस्टिंग किट ख़राब पायी गयी और सब-स्टैंडर्ड सामान की सप्लाई ने कोरोना से लड़ने की राह और मुश्किल कर दी।वर्षों से चीन की धोंस सहते आ रहे ग़रीब देश भी बड़ी शक्तियों का साथ मिलने से मुखर हो गये और उन्होंने चीन की खुलकर आलोचना शुरू कर दी।

CHINA - दुनिया का विरोध क्या झेल पाएगा चीन ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प इस वायरस को फैलाने के लिये चीन को कई बार चेतावनी दे चुके हैं।यूरोपीयन शक्तियों व दुनिया के शक्तिशाली देशों जर्मनी, फ़्रांस, ब्रिटेन,आस्ट्रेलिया,स्पेन,स्वीडन आदि ने कोरोना फैलाव में चीन की संदिग्ध भूमिका की आलोचना की है और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।जर्मनी ने तो कोरोना वायरस से हुए नुक़सान पर चीन से 130 अरब पौंड ( 12 लाख करोड़ ) हर्ज़ाने की माँग की है।निकट भविष्य में ब्रिटेनअमेरिका भी इतने भारी जुर्माने की माँग करने वाले हैं की चीन के होश उड़ जायेंगे।अमेरिका ने डबल्यूएचओ को चीन समर्थक मानते हुए व दुनिया को सही समय पर सावधान न करने के लिये उसकी 450 मिलियन डालर की फ़ण्डिंग रोक दी है।जापान ने चीन में कार्यरत अपनी तमाम कम्पनियों को चीन से बाहर निकलने के लिये कहा है और उसने उन्हें अन्य ज़गह स्थापित करने के लिये 2.2 बिलियन रूपए का फ़ण्ड बनाया है।आस्ट्रेलिया ने अपने सीनेटरों को रिश्वत देने व चीन समर्थक बिल बनाने की जाँच के लिये एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है।दक्षिण कोरिया ने अपनी प्रमुख कम्पनियों को जल्द चीन छोड़ने के लिये कहा है।इनमें सैमसंग सबसे प्रमुख है।फ़्रान्स,जर्मनी व अमेरिका की तमाम बड़ी कम्पनियाँ ने चीन से अपना बोरियाँ बिस्तरा समेट कर अन्य ज़गह तलाशनी शुरू कर दी है।भारत ने एफ़डीआई के नियमों में बदलाव कर चीन द्वारा सस्ते में भारतीय कम्पनियों में हिस्सेदारी ख़रीदने पर रोक लगा दी है।स्वीडन ने अपने देश में चल रहे, चीनी सभ्यता,भाषा व इतिहास का गुणगान करने वाले स्कूलों पर रोक लगाकर इन्हें बंद कर दिया है।इसमें पढ़ने वाले छात्र चीन के प्रति अपनी वफ़ादारी साबित करने के लिये ही जाने जाते हैं।एक ऐसा ही स्कूल अमेरिका के मेरीलैंड में था जिसे अमेरिकी सरकार ने जनवरी 2020 में ही बन्द कर दिया था।तनजानियां के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने चीन के साथ हुए 10 अरब डालर के समझोते को रद्द कर दिया है और कहा है कि कोई शराबी आदमी ही इसका पालन कर सकता है।गिनी व कीनिया देशों में भी चीन के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त ग़ुस्सा है।इसके अलावा भी बहुत से देश चीन के ख़िलाफ़ एकजुट होकर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

CHINA - दुनिया का विरोध क्या झेल पाएगा चीन ?

कोरोना संकट ने चीन को पूरी दुनिया में बदनाम कर दिया है।आज पूरा विश्व इसे चीनी वायरस के नाम से जान रहा है। पिछले कई वर्षों से कमाई हुई इज़्ज़त एक ग़लती की वजह से ख़त्म होने के कगार पर है।क्या चीन अपने आपको बदलकर विश्व शांति में योगदान देगा,इसकी सम्भावना न के बराबर है। धन्यवाद व जय हिन्द

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