BURDEN OF ASPIRATIONS – आकांक्षाओं का बोझ

आज की भाग दौड़ व प्रतिस्पर्धा से भरी ज़िन्दगी में हर आदमी इतना व्यस्त है की उसे अपना जीवन यापन करने व समाज में स्टेट्स हासिल करने के लिये तमाम तरह के साधनों का इंतज़ाम करना पड़ता है।अपने जीवन स्तर को ऊँचा बनाए रखने के साथ साथ हर अभिभावक का सपना होता है की वह अपने बच्चों को भी सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करें जो उन्हें समाज में एक अहम मुक़ाम हासिल करने में मदद कर सके।आज हर अभिभावक अपने बच्चों से अव्वल दर्जे में आने की अपेक्षा रखता है।इससे माँ बाप की अपेक्षाएँ अपने बच्चों के प्रति बहुत बढ़ गयी हैं।अधिकांश अभिभावक अपनी अतृप्त आकांक्षाओं का बोझ अपने बच्चों पर लादना चाहते हैं।धीरे धीरे ये अपेक्षाएँ तनाव का रूप धारण कर लेती हैं और इससे कई अनचाहे परिणाम सामने आते हैं।

पढ़ाई का बढ़ता दबाव

आज के इस भीषण प्रतिस्पर्धा के युग में बच्चे दोहरा दबाव झेल रहे हैं।एक तरफ़ सर्वोत्तम बनने के लिये परीक्षा में एक एक अंक की मारामारी है वहीं दूसरी तरफ़ अभिभावकों का दबाव, जो उसे इस तरह से सिखाते हैं की मानो सर्वश्रेष्ठ बनना ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। माँ बाप अपनी तमाम उम्मीदों का बोझ बच्चों पर थोप रहे हैं।कई बार माँ बाप के दबाव की वजह से बच्चों को अपनी पसंद के विपरीत एक ऐसे विषय में प्रवेश लेना पड़ता है जिसमें उनकी रुचि नहीं है।ऐसे विषय को पढ़कर बच्चों में आत्मग्लानि की भावना पैदा होती है।कई बार तो बच्चों के जन्म से ही उनकी प्राथमिकताये निर्धारित कर दी जाती हैं।परिवार व सामाजिक दबाव के चलते ही बच्चों में नैसर्गिक गुणों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाता है।बच्चों को जहाँ एक ओर परिवार व समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिये जी तोड़ मेहनत करनी पड़ती है वहीं दूसरी ओर भारी भरकम पाठ्यक्रम उनके शारीरिक व मानसिक विकास को अवरूद कर देता है।इन सबके बोझ तले दबकर बच्चे अपना नैसर्गिक बचपन खो रहे हैं और उनका दायरा सिमटता जा रहा है।

बच्चों को असफलता का सामना करना सिखायें

दुनिया में हर अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिये प्रयत्नशील है।वह अपने बच्चों को तमाम सुख सुविधाएँ देकर उन्हें जीवन में एक सफल व कामयाब इंसान बनाना चाहता है लेकिन जीवन में सफलता व असफलता साथ साथ चलती हैं इसलिये हर अभिभावक का कर्तव्य है की असफलता में भी दुगने उत्साह से उनका उत्साहवर्धन करें। सफलता का उत्साह स्वाभाविक है किन्तु असफलता तो नई सम्भावनाएँ पैदा करती हैं।असफलता ही हमें पुनः ज़ोर शोर से आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित करती हैं।एक सफल इन्सान के मुक़ाबले असफल इन्सान की कोशिशें ज्यादा गम्भीर व असरदायक होती हैं। अगर यह प्रेरणदायक बातें हम अपने बच्चों के दिमाग़ में बैठा दें तो भविष्य में वह असफलता का सामना करने से कभी नहीं घबरायेगा और बेहतर इन्सान बन कर आपके सपनों को साकार करने के लिये जी जान से जुट जायेगा।

बच्चों के प्रेरणास्त्रोत्र बनें ना कि आकांक्षाओं के पहाड़

अपने झूठे अहंकार व ऊँचे स्टेट्स से बाहर निक़लिए और बच्चों के साथ एक मज़बूत रिश्ता बनाइए।आज डॉक्टर, इंजीनियर से हटकर भी लाखों करियर उपलब्ध हैं और जिनमें पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं।बच्चों की रुचि,अभिरुचि के बारे में विस्तार से जानिये और उनके सुझाये गये फ़ील्ड में सर्वश्रेष्ठ की खोज की कर बच्चों में अपना विश्वास बनाइये।उसे गले लगाकर सारी कड़वाहट मिटा दीजिए।आपकी विशाल शख़्सियत के आगे बच्चे ख़ुद को बौना महसूस करते हैं।वे आपके विश्वास को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते हैं क्योंकि वह आपसे बहुत प्यार करते हैं इसलिए वह आपकी हर बात मान जाते हैं।आप भी अपना बड़प्पन दिखाइए और उसे अपने हिसाब से आगे बढ़ने का मौक़ा प्रदान करें।आपका फ़ैसला आपसी रिश्तों को एक नयी ऊँचाई पर पहुँचा देगा।जहाँ आपको अपने फ़ैसले पर गर्व होगा वहीं बच्चों को आप पर, उन्हें समझने व उनके लिये फ़ैसले पर विश्वास जताने के लिये। धन्यवाद व जय हिन्द

7 Replies to “BURDEN OF ASPIRATIONS – आकांक्षाओं का बोझ”

  1. very rightly said!! 👍
    hamari pidhi ko ye sochna chahiye ki agar hum apna career swayam nahi chun paye to kam se kam..apne bachhoon ko unki ruchi k hisab se career chun ne ka mauka de..
    ise hi kehte hain anubhav se sikhna..

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