BUDDHA –  बुद्धम शरणम गच्छामि

BUDDHA – बुद्धम शरणम गच्छामि

भगवान गौतम बुद्ध जिन्होने पूरी दुनिया को सत्य व सच्ची मानवता का पाठ पढ़ाया और अहिंसा व सदाचार अपनाने के लिये प्रेरित किया।भगवान बुद्ध ने जीवन जीने के मायने कुछ इस तरह से बताये की मनुष्य अपनी इच्छा व तृष्णा का त्याग कर अपने जीवन को सुखी व ख़ुशहाल बना सके।भगवान बुद्ध के इन्ही मानवतावादी व विज्ञानवादी बौद्ध धर्म दर्शन से पूरी दुनिया नतमस्तक है।उनके इन्ही अदभुत विचारों के कारण आज पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या बढ़ रही है और उन्हें दुनिया का सबसे महान महापुरुष माना जाता है।

BUDDHA -  बुद्धम शरणम गच्छामि

पूरी दुनिया को अपने विचारों व जीवन दर्शन के सिद्धान्तों से प्रभावित करने वाले भगवान बुद्ध का जन्म 483 ईस्वी पूर्व लुंबिनि (अब नेपाल में ) में हुआ।उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।बचपन से ही जिज्ञासु स्वभाव के सिद्धार्थ ने समय समय पर कई ऐसी घटनाओं का सामना किया जिनसे उनकी जन्म व मृत्यु के रहस्य को समझने व उसकी गहराइयों तक जाने की प्रबल इच्छा हुई।परम ज्ञान की प्राप्ति में सिद्धार्थ ने अपनी सभी सुख सुविधाओं को त्याग दिया और अपनी पत्नी व पुत्र को छोड़ कर वैराग्य जीवन की राह पकड़ ली। गृह त्याग के पश्चात सिद्धार्थ सात वर्षों तक वन में भटकते रहे।उन्होंने कई वर्षों तक कठोर तप किया लेकिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई।अंततः वह कठोर तपस्या को छोड़ कर एक पीपल के वृक्ष के नीचे प्रतिज्ञा करके बैठ गये की सत्य को जाने व समझें बिना वह नहीं उठेंगे।सारी रात वृक्ष के नीचे बैठने के बाद उन्हें पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने न केवल जीवन-मृत्यु के रहस्य को समझा अपितु उन्हें अंतिम सत्य की भी प्राप्ति हुई।जिस वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान ने ज्ञान की प्राप्ति की वह आज भी सैंकड़ो वर्ष पश्चात बिहार के बोधगया में बोधिवृक्ष के रूप में प्रसिध्द है और लाखों भक्तजन प्रतिवर्ष अपने देवता की पूजा करने के लिये यहाँ अपने शीश झुकाते हैं।

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भगवान बुद्ध का जन्म, परम ज्ञान की प्राप्ति व महानिर्वाण दिवस, ये तीनों एक ही दिन यानि बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाये जाते हैं। दुनिया के किसी भी धर्मगुरु के साथ ऐसी अनोखी घटना नहीं हुई है जिसमें जीवन की तीन मूल बातें एक ही दिन घटित हुई हों। भगवान बुद्ध ने अपने ज्ञान से पूरी दुनिया में एक नयी रोशनी पैदा की और जीवन को सरल व सुखी बनाने के उपाय बताये।उन्होंने जनमानस को चार प्रमुख संदेश दिये जिन्हें हर बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर लोगों में प्रसारित किया जाता है। भगवान बुद्ध के अनुसार इस दुनिया में हर स्थिति में केवल दुखःहै।जन्म में, बुढ़ापे में, बीमारी में और मृत्यु में सब में दुखः है और इसका मूल कारण मनुष्य की कभी न ख़त्म होने वाली इच्छाएँ व तृष्णा है। मानव स्वभाव में जब इच्छा व तृष्णा का अंत हो जायेगा तो जीवन के समस्त दुखः स्वत समाप्त हो जायेंगे। बौद्ध धर्म में दिए गये सुखी जीवन के इन आठ मार्गों को अपना कर कोई भी मनुष्य अपनी इच्छाओं का अन्त कर सकता है।सुझाये गये जीवन के आठ मार्ग सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक, सम्यक कर्म, सही आजीविका, सम्यक प्रयास, सत्य स्मृति और सम्यक समाधि।इन आठ सूत्रों को अपने जीवन में अपनाकर कोई भी मनुष्य परम सुख व आनंद की प्राप्ति कर सकता है।

BUDDHA -  बुद्धम शरणम गच्छामि

भगवान बुद्ध ने अपने अमर कथन से दुनिया को नतमस्तक कर दिया।भगवान के मुताबिक़ तीन चीज़ें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकती हैं सूर्य, चन्द्रमा व सत्य। बुराई होनी चाहिये ताकि अच्छाई उसके ऊपर अपनी पवित्रता साबित कर सके। जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती है ठीक वैसे मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता है।मनुष्य के पास स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है और वफ़ादारी सबसे बड़ा सम्बन्ध है। भगवान बुद्ध ने अपनी पूरी आयु को दुनिया को शान्ति व सत्य की राह दिखाने में व्यतीत कर दी।उनके दिखाये हुए मार्ग पर चलकर करोड़ों लोगों के जीवन का उद्धार हुआ है।हमें भी भगवान के दिखाये हुए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सरल व सुखी बनाने की ओर क़दम बढ़ाने चाहिये। धन्यवाद व जय हिन्द

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