AMERICA – नया अमेरिका कितना सक्षम ?

AMERICA – नया अमेरिका कितना सक्षम ?

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सबसे बड़ी सैन्य शक्ति व वैश्विक व्यापार केन्द्र का मालिक सुपर पॉवर अमेरिका आज घुटनों के बल आ चुका है। वैश्विक बीमारी कोरोना ने उसे ख़ून के आँसू रोने पर मजबूर कर दिया है।अपने तमाम साधन झोंकने के बावजूद इस बीमारी पर विजय पाना उसके लिये टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।दिनों दिन मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।मानवीय क्षति के साथ साथ उसे आर्थिक तौर पर भी बड़ी भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है।लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के ठप्प होने के कारण लोगों को बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।लोगों में डर व अलगाव की भावना घर कर गयी है।बेरोज़गारी व बेघर होने के डर से लोग सकते में आ गये हैं।ऐसी अभूतपूर्व स्थिति का सामना अमेरिका ने इससे पहले कभी नहीं किया है। ऐसे अक्षम अमेरिका की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी।

AMERICA - नया अमेरिका कितना सक्षम ?

अमेरिका में बेरोज़गारी बढ़ने से अधिकांश अमेरिकी अपने मकान की किश्तें नहीं चुका पा रहे हैं।राष्ट्रीय मल्टी फ़ैमिली हाऊसिंग कौंसिल के मुताबिक़ अप्रैल के दूसरे हफ़्ते तक 69% लोगों ने ही अपने घर का किराया चुकाया है।जबकि मार्च में यह आँकड़ा 81% था।इससे अमेरिका के अधिकांश राज्यों में मकान मालिक घर ख़ाली करने के नोटिस भेज रहे हैं।मकान मालिक ख़ुद अपनी आजीविका ख़त्म होने की दुहाई दे रहे हैं।अमेरिका के ज्यादातर राज्यों ने इसके ख़िलाफ़ क़ानून बना रखा है,लेकिन फिर भी अदालतों में ऐसे मामलों की बाढ़ आ गयी है। अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा भी बेरोज़गारी से जुड़ा हुआ है। वहाँ अब तक तक़रीबन 2.60 करोड़ लोग बेरोज़गारी भत्ते के लिये आवेदन कर चुके हैं। एक सप्ताह में ही इनकी तादाद में 44 लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने वालों के लिए बनाये गये फ़ूड बैंक में अचानक भीड़ बढ गयी है। बहुत से लोग जीवन में पहली बार फ़ूड बैंक से खाना लेने के लिये मजबूर हुए हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए गये राशन वितरण केन्द्र पर सैंकड़ों की संख्या में लोग उमड़ रहे हैं और रोज़ाना इनमें नये लोग शामिल हो रहे हैं।

AMERICA - नया अमेरिका कितना सक्षम ?

कोरोना संक्रमण के डर से माँ बाप अपने छोटे बच्चों को दूसरी ख़तरनाक बीमारियों से बचाव के लिये टीके लगवाने के लिये अस्पताल नहीं आ रहे हैं। इससे बीमारी से बचाव का क्रम टूटने व रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने की सम्भावना बढ़ गयी है।अमेरिका के 1000 से ज्यादा क्लीनिक से जुटाई गयी जानकारी के अनुसार फ़रवरी के मुक़ाबले अप्रैल के पहले हफ़्ते तक टीकाकरण में 50 से 70% तक की गिरावट दर्ज की गयी है।अमेरिका में लोगों को कोरोना वायरस ने इतना ज्यादा डरा दिया है की लोग अपनी वसीयत बनवा रहें हैं और अपने प्रियजनों को अपनी निजी व ज़रूरी बातों से अवगत करा रहे हैं।कोरोना संक्रमण ने एक आम अमेरिकी की आदत, कमाओ और ख़र्च करो में मूलभूत बदलाव किया है।आज अमेरिका के 85% से ज्यादा लोग ग्रोसरी व हेल्थ प्रॉडक्ट की जमाख़ोरी कर रहे हैं, इससे अमेरिका के कई हिस्सों में इनकी ज़बरदस्त क़िल्लत हो गयी है।ग्रोसरी के स्टोर पूरे ख़ाली हो गये हैं।चावल व सूखे अनाज की ख़रीददारी में 386% की तेज़ी आयी है।आज मास्क, सेनिटाइज़र,ग्लव्स ख़रीदने के लिये पूरा शहर घूमना पड़ता है।एक औसत अमेरिकी एक की जगह 6 हैंड ग्लव्स ख़रीद रहा है यही स्थिति मास्क व दूसरी चीज़ों में है।जमाख़ोरी की इस आदत ने सरकार पर बहुत दबाव बढ़ा दिया है।

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दुनिया की एक मात्र महाशक्ति को आज मिस्र व ताईवान जैसे छोटे देशों से मदद लेने के लिये मजबूर होना पड़ा है।दुनियाभर की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाला अमेरिका आज बेशक झुका हुआ नज़र आ रहा है लेकिन वक़्त बदलते देर नहीं लगती है।अमेरिका में इन कठिनाइयों से उबरने की असीम क्षमता है।अपनी विशाल अर्थव्यवस्था व नयी सोच की बदोलत अमेरिका फिर से पूरे विश्व पर छाने के लिये फिर से उठ खड़ा होगा। धन्यवाद व जय हिन्द

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