हिन्दी दिवस – राष्ट्रभाषा के बढ़ते क़दम

हिन्दी दुनिया में बोली जाने वाली तीसरी सबसे बड़ी भाषा है।दुनिया भर की आबादी का क़रीब 10% हिस्सा यानि क़रीब 70 करोड़ लोग हिन्दी को जानते व समझते हैं।हिन्दी के महत्व को प्रतिपादित करने व उसको जन-जन तक पहुँचाने के लिये प्रति वर्ष 14 सितम्बर को पूरे देश भर में हिन्दी दिवस धूमधाम से मनाया जाता है।इस दिन राजभाषा को जनमानस तक पहुँचाने व उसे प्रोत्साहित करने के लिये कई आयोजनों का संचालन किया जाता है।जिनमें हिन्दी लेखन,निबन्ध व वाद-विवाद के द्वारा हिन्दी भाषा के उपयोग की शिक्षा दी जाती है व हिन्दी को अधिक से अधिक प्रचारित व प्रसारित किया जाता है।

हिन्दी भाषा का बढ़ता महत्व

आज के व्यवसायिक मनोरंजन जगत में हिन्दी भाषा का सर्वोच्य स्थान है।हिन्दी भाषी दर्शकों की अपार संख्या को देखकर विज्ञापन जगत, सिनेमा, टीवी व अन्य व्यवसायिक जगत में तेज़ हलचल बनी हुई है।जहाँ हिन्दी फ़िल्म उद्योग के बढ़ते प्रभाव से विश्व के तमाम बड़े फ़िल्म स्टूडियो अपनी अंग्रेज़ी भाषी फ़िल्मों को हिन्दी में डब कर रहे हैं वहीं टीवी जगत के तमाम बड़े स्टूडियो विभिन्न ओटीटी प्लेटफ़ार्म के लिये हिन्दी भाषा में सैंकड़ों की संख्या में वेब सीरीज़ का निर्माण कर रहे हैं।विज्ञापन जगत से लेकर सोशल मीडिया में हिन्दी भाषी लोगों की मदद के लिये काम हो रहा है।ऑनलाइन शॉपिंग की बड़ी कम्पनीयों से लेकर पैसा भुगतान की तमाम कम्पनीयों ने हिन्दी भाषी लोगों की सुविधा के लिये नये व आसान ऐप प्रस्तुत किये हैं।तमाम बड़ी संस्थाओं व सरकारों को नये सिरे से अपनी रणनीति को सँवार कर प्रस्तुत करना पड़ा है।यही हिन्दी की बढ़ती ताक़त को दर्शाता है।

अनेकता में एकता प्रस्तुत करती हिन्दी

हमारे देश में विभिन्न धर्मों व सम्प्रदाय के लोग निवास करते हैं।उनके खान-पान, रहन-सहन व वेशभूषा भले ही अलग अलग हो,लेकिन हिन्दी ने सभी को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।विश्व की सबसे सभ्य, सुसंस्कृत व समृद्ध भाषाओं में से एक माने जाने वाली हिन्दी ने हमेशा धर्म, भाषा, संस्कृति की दीवारों को तोड़ कर जनमानस के दिलों पर राज किया है।देश के दूरस्थ इलाक़े हों या हज़ारों किमी. की दूरी पर बसे देश,आपको सभी जगह हिन्दी जानने वाले, समझने वाले व उसके प्रति सम्मान प्रदर्शित करने वाले मिलेंगे, यही हिन्दी भाषा की जीत है।इसने हमें हमेशा गौरान्वित किया है।

हिन्दी की उपेक्षा भी कम नहीं

यह विडम्बना है कि जहाँ हिन्दी पूरे विश्व में पैर प्रसार रही है वहीं देश के कुछ हिस्सों में इसके ख़िलाफ़ अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेकने के लिये आन्दोलन किये जा रहे हैं।पूरे दक्षिण भारत में हिन्दी सीखने वालों की संख्या में बड़ी तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है।इसी से घबरा कर कुछ दल हिन्दी भाषा के ख़िलाफ़ आन्दोलन पर उतर आये हैं।उन्हें अपनी राजनैतिक ज़मीन खिसकती महसूस हो रही है।वह भाषा व संस्कृति के नाम पर स्थानीय युवाओं को वैचारिक रूप से बन्धक बनाकर रखना चाहते है और अपनी संस्कृति व पहचान खोने का डर दिखाकर आन्दोलन को बढ़ावा दे रहे हैं जबकि इतिहास गवाह है की हिन्दी ने सभी भाषाओं के शब्द ग्रहण कर उनका सम्मान ही किया है।इसके अलावा भी विभिन्न सरकारी व निजी संस्थानों में हिन्दी के प्रति भेदभाव दिखा कर अंग्रेज़ी में कार्य किया जाता है।ऐसे संस्थानों में हिन्दी को दूसरे दर्जे की भाषा मानकर उससे अनुचित व्यवहार किया जाता है।जहाँ पूरा विश्व हिन्दी अपनाने को लालायित हो रहा है,वहाँ अपने देश में राष्ट्रभाषा की यह हालत समझ से परे व निन्दनीय है।

हिंदुस्तान की जान है हिन्दी

हिन्दी भाषा से निकले शब्दों ने ही नहीं बल्कि क्रिया व भावों ने भी पूरे विश्व में धाक जमा रखी है।आज पूरा संसार नमस्ते कर रहा है और भाव अभिव्यक्ति के इस रूप का जमकर प्रयोग कर रहा है।यही हिन्दी व हिंदुस्तान की ताक़त है।हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिंदुस्तान हमारा, की भावना को चरितार्थ करते हुए हिन्दी ने जो पूरे विश्व में अपना सिर ऊँचा किया है, उसे बनाये रखना ही हिन्दी के प्रति हमारी सच्ची देशभक्ति होगी।हम सभी को हिन्दी के विकास मे आने वाली तमाम कठिनाइयों को दूर करने के लिये एकजुट होना होगा,तभी हम उसे शिखर पर स्थापित कर गौरान्वित महसूस कर पायेंगे। धन्यवाद व जय हिन्द (उपरोक्त लेख में अंग्रेज़ी व उर्दू भाषाओं का प्रयोग आपकी सुविधा के लिये किया गया है,यही हिन्दी की ख़ूबसूरती को दर्शाता है।)

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