हिंदी भाषी अभिनेत्रियों का साउथ फ़िल्मों में जलवा

हिंदी भाषी अभिनेत्रियों का साउथ फ़िल्मों में जलवा

सन 1950-60 के दशक में दक्षिण भारत की मशहूर अभिनेत्री पदमिनी ने,हिंदी फ़िल्म उधोग में अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत की।पदमिनी को चाहे आशाजनक सफलता न मिली हो,पर उसने अन्य दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों के लिए बॉलीवुड के द्वार खोल दिए। दक्षिण भारत से वैजयन्ती माला,हेमा मालिनी,रेखा,श्री देवी,जयाप्रदा व ऐश्वर्या राय जैसी नामचीन अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय के बल पर न केवल लोगों का दिल जीता अपितु सालों तक बॉलीवुड पर राज किया।लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उलटी बयार बह रही है। बॉलीवुड की प्रतिभाशाली व ख़ूबसूरत अभिनेत्रियों ने साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में धूम मचा रखी है।और अपने टैलेंट के दम पर लाखों की फ़ैन फ़ॉलोइंग को दीवाना बना रखा है।आईये कुछ प्रतिभावान अभिनेत्रियों के बारे में जानते हैं।

हिंदी भाषी अभिनेत्रियों का साउथ फ़िल्मों में जलवा

राशी खन्ना – राशी ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत 2013 में दिग्गज फ़िल्म अभिनेता जान अब्राहम के साथ फ़िल्म ‘मद्रास कैफ़े’ से की।नई दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ी राशी में अभिनेत्री बनने के गुण कूट कूट कर भरें हैं। 2013 में ही राशी ने तेलुगु फ़िल्म ‘मनस’ में एक कैमियो ( विशेष भूमिका ) से अपने दक्षिण भारत के सफ़र की शुरुआत की।2014 में राशी को तेलुगु फ़िल्म ‘ऊहालु गुसदुसलादू’ के लिये SIIMA का श्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। 2014-15 में उन्होंने अनेक सुपर हिट फ़िल्में दी।इन फ़िल्मों की कामयाबी ने उन्हें दक्षिण भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया। सन 2015 में बंगाल टाइगर,2016 में सुप्रीम,2017 में जय लव कुशा जैसी सूपर हिट फ़िल्मों ने उनके करियर को एक नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया। 2018 में आयी फ़िल्म tholi prema में उनके अभिनय ने लोगों का मन मोह लिया। आज फ़िल्म इंडस्ट्री में उनका नाम ही उनकी पहचान है।

हिंदी भाषी अभिनेत्रियों का साउथ फ़िल्मों में जलवा

रकुल प्रीत सिंह – नई दिल्ली के पंजाबी सिख परिवार में जन्मी रकुल आज तेलुगु,तमिल व हिंदी फ़िल्मों की प्रमुख अभिनेत्री है।नई दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज में पढ़ने वाली रकुल प्रीत ने एक मॉडल के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत की थी।वह गोल्फ़ की अच्छी खिलाड़ी रही है।उसने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्फ़ का प्रतिनिधित्व किया है।रकुल ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत 2009 में एक कन्नड़ फ़िल्म ‘गिल्ली’ से की है।लेकिन इस फ़िल्म के बाद रकुल फिर पढ़ाई में जुट गयी। 2 साल बाद रकुल ने तेलुगु फ़िल्म ‘करतम’ में एक छोटी से भूमिका से वापसी की।फ़िल्म में उनकी विशेष भूमिका की काफ़ी सराहना हुई।2012 में उन्होंने तमिल फ़िल्म ’ठदाईयारा थाक्का’ में सहायक भूमिका निभाई। 2013 में ही तमिल फ़िल्म ‘पुथग़म’ व तेलुगु फ़िल्म ‘वेंकटद्री एक्सप्रेस’ में उनके अभिनय ने लोगों का दिल जीत लिया।और उन्हें सर्वश्रेस्ठ अभिनेत्री का 61 वाँ फ़िल्म फेयर अवार्ड प्राप्त हुआ। 2015 में रकुल को साउथ फ़िल्मस के टॉप स्टार के साथ 6 फ़िल्में करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।जिनमे 4 तेलुगु व 2 तमिल फ़िल्में थी।आज रकुल की गिनती दक्षिण भारत की टॉप अभिनेत्रियों में होती है। 2016 में हैदराबाद में घर ख़रीदकर रकुल अपने माता-पिता के साथ वही शिफ़्ट हो गयी है। रकुल प्रीत सिंह आज तेलंगाना सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्राण्ड अंबेसडर है।

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काजल अग्रवाल – 19 जून 1985 को मुंबई में जन्मी काजल ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई भी मुंबई के क़िशिचन्द्र चेल्लाराम महाविधालय से की है।काजल ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत हिंदी फ़िल्म ‘क्यूँ ! हो गया न’ फ़िल्म में एक छोटे से किरदार से की थी पहली फ़िल्म के बाद ही उन्हें तेलुगु फ़िल्म ‘लक्ष्मी कल्याण’ में काम करने का अवसर मिला।फ़िल्म बुरी तरह से फ़्लॉप साबित हुई। 2008 में काजल ने तीन तमिल फ़िल्मों में अभिनय किया।लेकिन अत्यन्त छोटे रोल के लिये उन्हें किसी ने भी नोटिस नहीं किया। 2009 में ‘मोधि विलयडु’ नामक फ़िल्म में काजल को पहली बार मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला।लेकिन यह फ़िल्म भी बुरी तरह से फ़्लॉप हो गयी। इसी वर्ष काजल को भारी लागत से बनने वाली ऐतिहासिक फ़िल्म ‘मगधीरा’ में काम करने का अवसर मिला। अभिनेता राम चरण तेजा के साथ की गयी इस फ़िल्म ने भारी सफलता हासिल की।फ़िल्म ने सारे रिकार्ड तोड़ डाले।और फ़िल्म तेलुगु सिनेमा के इतिहास में सबसे ज़्यादा कमाने वाली फ़िल्मों की जमात में शामिल हो गयी।इसी एक फ़िल्म ने काजल को मेनस्ट्रीम अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर दिया।इस फ़िल्म के बाद काजल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है।आज काजल तमिल,तेलुगु व हिंदी फ़िल्मों में समान रूप से छायी हुई है।

हिंदी भाषी अभिनेत्रियों का साउथ फ़िल्मों में जलवा

तमन्ना भाटिया – 21 दिसम्बर 1985 को मुंबई में जन्मी तम्मना ने अपने अभिनय के सफ़र की शुरुआत 2005 में एक हिंदी फ़िल्म ‘चाँद सा रोशन चेहरा’ से की।लेकिन फ़िल्म से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण तमन्ना ने दक्षिण भारत की राह पकड़ ली।सन 2005 से 2009 के बीच तमन्ना ने तेलुगु व तमिल सिनेमा की अनेक फ़िल्मों में काम किया।जिनमें ‘श्री’ ‘व्यापारी’ ‘कालिदास’ व ‘अयान’ प्रमुख थी। 2009 में तमन्ना को तमिल फ़िल्म ‘पैया’ के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्मफेयर अवार्ड मिला।2011 में भी तेलुगु फ़िल्म ‘100% लव’ के लिये उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का तेलुगु फ़िल्मफेयर अवॉर्ड जीता। तमन्ना ने अपने फ़िल्मी सफ़र में दक्षिण भारत के तमाम बड़े दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम किया है। 2013 में तमन्ना ने बॉलीवुड में वापसी की।उन्होंने अजय देवगन,सैफ़ अली खान,अक्षय कुमार जैसे टॉप के अभिनेताओं के साथ फ़िल्मों में अपने अभिनय के जौहर दिखाये हैं।सन 2015 में आयी बाहुबलि में उनके निभाये किरदार ‘अवंतिका’ ने उन्हें पूरे भारत में चर्चित कर दिया है।आज तमन्ना भाटिया को दर्शक उनके निभाए गए हर किरदार के लिये पसंद करते हैं।

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इसके अलावा भी ताप्सी पन्नु, इलियाना डिक्रूज,नेहा शर्मा जैसीं अनेक अभिनेत्रियाँ अपने अभिनय के जौहर दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में दिखाती रहीं हैं।बॉलीवुड की बड़ी अभिनेत्रियों जैसे कटरीना कैफ़ ,प्रियंका चोपड़ा, ऐश्वर्या राय,सोनाक्षी सिन्हा,विधा बालन,कंगना रनौत यदा कदा अपनी चमक दक्षिण भारत की फ़िल्मों में दिखाती रही हैं।आज दुनिया एक ग्लोबल विलेज के रूप में आगे बढ़ रही है।हमें भी अपने भाषावाद व प्रांतवाद के नज़रिए को त्यागकर इनके अभिनय की सराहना करनी चाहिये।और हर भाषा व प्रांत के व्यक्ति का दिल खोलकर स्वागत करना चाहिये। धन्यवाद व जय हिन्द

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