सोचो, साथ क्या लेकर जाओगे

सोचो, साथ क्या लेकर जाओगे

इन्सान जन्म लेता है और एक दिन इस संसार से विदा लेता है।इस छोटी सी ज़िन्दगी में तमाम उम्र वह धन दौलत व सुख सुविधा के साधन एकत्र करने में गुज़ार देता है।रिश्ते नातों, मित्रों व समाज को भूलकर वह येन केन हर जगह से अपने भौतिक सुख की चीज़ें समेटने में लगा रहता है।भौतिक चीज़ों का संग्रहण एक हद तक ही उचित माना जा सकता है।इसके बाद लालच बढ़ने लगती है।वह अपने फ़ायदे के लिये दूसरों को नुक़सान पहुँचाने से भी पीछे नहीं हटता है।धीरे धीरे वह इसमें पारंगत होकर अपार सम्पति व साधन एकत्र कर लेता है।अपने आने वाले कल को बेहतरीन बनाने के लिये वह आज को भूल जाता है।यही उसकी सबसे बड़ी ग़लती साबित होती है।

सोचो, साथ क्या लेकर जाओगे

अपने जीने के मक़सद को पहचानिये

ये पैसा, प्रोपर्टी, सुख सुविधा के साधन तमाम धरे के धरे रह जायेंगे, जब मृत्यु होगी तो आप नितान्त अकेले होंगे।कोई भी आपके साथ नहीं जायेगा।आप ख़ाली हाथ आये थे और ख़ाली हाथ ही जायेंगे।छोड़ जायेंगे तो बस चंद यादें और अपने किये गये कर्म। जिस सुख सम्पदा के साधनों के लिये आपने अपनी सारी ज़िन्दगी दाँव पर लगा दी, आप चाहकर भी उसका 1% हिस्सा भी साथ नहीं ले जा पायेंगे।जब हम कुछ साथ नहीं ले जा पायेंगे तो हमने यह सारा तामझाम किसके लिये इक्टठा किया है,अपने परिवार के लिये, अपने सगे सम्बन्धियों के लिये।जो वक़्त रहते आपके काम नहीं आये।सब कुछ होते हुए भी आप अकेले व अपने आप में सिमटे हुए हैं।इससे पहले की आपकी ज़रूरत ख़त्म हो जाये और आप दरकिनार कर दिये जायें, अपने उद्देश्य पहचानिए।जिस समाज ने आपको भर-भर कर साधन मुहैया करवाए हैं, उसे वापिस लौटाने का वक़्त आ गया है।जीवन जीने का सही मक़सद पहचानकर ही हम अपने जीवन को सार्थक व संभावनाओं से भरपूर बना सकते हैं।

सोचो, साथ क्या लेकर जाओगे

नई शुरुआत के लिये वक़्त मायने नहीं रखता है

अपने जीवन के किसी भी मोड़ पर आप नयी शुरुआत कर सकते हैं।इसके लिये वक़्त या उम्र के कोई मायने नहीं हैं।जब तक आपकी साँसे चल रही हैं,आपमें जीवन की तमाम नवीन ऊर्जा हर क्षण मौजूद रहती है।अपने आपको थका हुआ या रुका हुआ मानने से आप निराशा के अंधकार में घिर सकते हैं।अपने मन की अंदरूनी शक्ति को पहचानिए और जुट जायें।अपने विचारों में बदलाव लाकर ही आप समाज में बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं।समाज को आपके इस योगदान की हमेशा ज़रूरत रहती है।दबे कुचले, ग़रीब व जरूरतमंद लोगों की मदद कर अपने मानव जन्म को सार्थक सिद्ध कर सकते हैं।आपके पास न बीता हुआ कल है और न ही आने वाला।जीवन की इस संध्या में केवल वर्तमान ही शेष है, क्यों न इसे ही बेहतरीन तरीक़े से जिया जाये और अपने जीवन की सार्थकता सिद्ध की जाये। धन्यवाद व जय हिन्द

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