SHAHEED BHAGAT SINGH- शहीद भगत सिंह

SHAHEED BHAGAT SINGH- शहीद भगत सिंह

SHAHEED BHAGAT SINGH- शहीद भगत सिंह

आज राष्ट्र आज़ादी के मतवाले भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव की अल्प आयु में भारत माता के लिए दी गयी क़ुर्बानी के लिये उन्हें शत शत नमन करता है ।उन्ही की याद में 23 मार्च को पूरे भारतवर्ष में शहीद दिवस का आयोजन किया जाता है। आज हम भगत सिंह की जीवनी के बारे में पढ़ेंगे जिन्होंने इतनी कम आयु में देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी। उनके महान विचारों और देश प्रेम ने ही उन्हें शहीदे आज़म भगत सिंह का दर्जा प्रदान किया है।

SHAHEED BHAGAT SINGH- शहीद भगत सिंह

भगत सिंह का जन्म 27 सितम्बर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा गाँव में हुआ। जो अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार राजनीतिक रूप में सक्रिय था।जिसका भगत सिंह पर व्यापक प्रभाव पडा। 12 वर्ष की उम्र में ही भगत सिंह ने क्रांतिकारी साहित्य पढ़ना शुरू कर दिया था। जीवन के इस पढाव में भी वह प्रतिभाशाली और समाजवाद की ओर आकर्षित युवा थे। कुछ समय पश्चात वह अक्सर विचार करते थे कि वह गांधी जी के अहिंसात्मक विचारों का समर्थन करें या क्रांतिकारीयों के हिंसक आंदोलन का। इसी बीच अंग्रेज़ों द्वारा जलियांवाला बाग़ में सैकडों निहथे हिंदुस्तानियो का क़त्ल कर दिया गया। तो भगत सिंह का ख़ून खौल उठा। वह अभी अंग्रेज़ों का विरोध करने का विचार कर ही रहे थे की काकोरी कांड में 4 क्रांतिकारीयो को फाँसी की सज़ा ने आग में घी डालने का काम किया।उनके मन में एक दृढ़ निश्चय घर कर गया की हिंसा का जवाब अहिंसा नहीं हो सकता। मन में देश प्रेम की ज्वाला लिए इस आज़ादी के परवाने ने राजगुरु के साथ मिलकर लाहौर के अंग्रेज़ पुलिस अफ़सर जे. पी. साँडर्स को गोली से उड़ा दिया। इसमें चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी भरपूर मदद की। इस हत्या कांड ने अंग्रेज़ी हकूमत को दहला कर रख दिया। भगत सिंह के क़िस्से सरकार की नाक में दम किए हुए थे। सरकार ने भगत सिंह के लिए कई बार जाल बिछाया परंतु वह हर बार साफ़ निकल जाते थे। अब भगत सिंह को विश्वास हो गया था कि क्रांति की ज्वाला पूरे देश में जल चुकी है। उन्होंने राजगुरु के साथ,ब्रिटिश भारत की संट्रेल असेंबली में अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिए बम व पर्चे फेंके। बम फैकने के बाद वही पर दोनो ने अपनी गिरफ़्तारी दी थी। इस घटना की गूँज लंदन तक सुनाई दी और अंग्रेज़ हकूमत के मन में पहली बार डर पैदा हुआ। भगत सिंह अपने इरादे में पूरी तरह से कामयाब हुए। क्रांतिकारीयो की नई जमात को रोकने व भय पैदा करने के लिए सरकार ने भगत सिंह,राजगुरु व सुखदेव को तय समय से पहले ही फाँसी पर चढ़ा दिया।

 

SHAHEED BHAGAT SINGH- शहीद भगत सिंह

शहीद भगत सिंह बहुमुखी प्रतिभा के धनी क्रांतिकारी थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता इस युवा क्रांतिकारी ने कई अख़बारों के सम्पादक की जिम्मेदारी भी निभाई थी। वह जेल में रहते हुए भी निरंतर अध्ययनशील रहे। इस दौरान लिखे गए लेख व पत्र उनके विचारों के दर्पण प्रतीत होते हैं।मात्र 23 वर्ष की उम्र में फाँसी की सज़ा पाने वाले वह सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी है। वह केवल ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ ही मुखर नहीं थे अपितु भारत के साम्प्रदायिक विभाजन के भी सख़्त विरोधी थे।भगत सिंह ने ही इंक़लाब ज़िंदाबाद का अमर नारा दिया।जो भारत में सशस्त्र संघर्ष का प्रतीक बन गया। मरने से दो घंटे पहले मिलने आये वक़ील ने पूछा, आप देश को क्या संदेश देना चाहते हैं।तो भगत सिंह ने मुस्कराकर कहा की सिर्फ़ दो संदेश – साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और इंक़लाब ज़िंदाबाद। उनकी शहादत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद पर जीत के रूप में देखा जाता है। आज भी भारत और पाकिस्तान की जनता उनको आज़ादी के दीवाने के रूप में पूजती है। —- धन्यवाद व जय हिंद

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