WOMEN’S DAY-  मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी ( पाकिस्तान से )

WOMEN’S DAY- मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी ( पाकिस्तान से )

मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने औरतों पर तीखी बहस के बीच 8 मार्च 2020 रविवार को औरत मार्च की अनुमति दे दी है।आख़िर ये औरत मार्च है क्या,और पाकिस्तान में इतना हड़कम्प क्यों मचा है।दरअसल पिछले 70 साल से पाकिस्तान में महिलाओं की दशा एक दूसरे दर्जे के नागरिक सरीखी हो गयी है। पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर महिलाएँ आवाज़हीन,शक्तिहीन, व पुरुषों के अधिकार वाली मानी जाती है। ज़्यादातर महिलाओं को अपने व्यक्तिगत मामलों में निर्णय लेने की अनुमति नहीं है।और कुछ अपवादों को छोड़ दें तो किसी भी महिला को सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तय करने की अनुमति नहीं है।ओनर किलिंग,ज़बरनशादी,घरेलू हिंसा,बलात्कार व मानव तस्करी के बढ़ते मामलों ने पाकिस्तानी महिलाओं को तोड़ कर रख दिया है और उसे मजबूरन सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है।

एक पाकिस्तानी टी॰वी॰ चैनल में डिबेट के दौरान जानी मानी नारिवादी व ऐक्टिविस्ट मारवी सिरमद को,ख़लील उर रहमान ने जिस तरह गालीया निकाली और उनका अपमान किया,इससे मामला तूल पकड़ गया। मारवी सिरमद ने इस डिबेट में खुलेआम कहा कि मेरा जिस्म है,मेरी मर्ज़ी। बस यहीं से इस मामले ने ज़ोर पकड़ लिया। यह बहुचर्चित नारा अमेरिका में मेरा शरीर,मेरी पसंद के रूप में शुरू हुआ था।जिसमें औरतों की मर्ज़ी थी,की वो गर्भपात के लिए राज़ी है अथवा नहीं।बाद में यह नारा वेश्यवृति,शारीरिक उत्पीड़न,नशीली दवाओं के प्रयोग के ख़िलाफ़ भी कारगर साबित हुआ। पाकिस्तान में इसे बहुत ही बोल्ड नाम दिया गया, मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी

मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी, दरअसल औरतों द्वारा मर्दों से अपने माँगे जाने वाले अधिकार है,ताकि औरतों को भी समानता का हक़ मिले और समाज में व्याप्त कुरीतियाँ,उनके भविष्य को प्रभावित न कर पाए। इस विवादास्पद नारे के साथ पाकिस्तानी महिलाएँ सड़क पर उतर आयीं और पूरे पाकिस्तान में हड़कम्प मच गया। एक इस्लामिक मुल्क में औरतों द्वारा अपने हक़ में आवाज़ उठाना ग़ैर इस्लामिक और धर्म के विरुद्ध माना गया। मुल्लाओ ने इनके आंदोलन को पाकिस्तान के विरुद्ध बताते हुए, महिला सशक्तिकरण के विचार को ही बेमानी क़रार दे दिया। इन आलोचकों के मुताबिक़ इस आंदोलन का उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक मूल्यों को नुक़सान पहुँचाना है।और इस मुहीम से हमारी पारिवारिक परंपराएँ व विवाह संस्थाऐ नष्ट हो जाएगी ।उन्होंने इस आंदोलन को विदेशी साज़िश क़रार दिया है। वहीं इन नारीवादियों के समर्थन में हज़ारों लोग उठ खडे हुए हैं।इनके मुताबिक़ इस मुहीम को,महिलाओं को अपने शरीर पर अधिकार की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। बरहाल इस सब से दूर महिलाएँ अपने हक़ के लिए 8मार्च 2020 को विश्व महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक विशाल औरत मार्च का आयोजन कर रही हैं। उन्हें इस मार्च से अपने हक़ में कई चीज़ें बदलने की उम्मीद है,और दुनिया उम्मीद पर चलती है। धन्यवाद व जय हिंद

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