CHANAKYA NITI – चाणक्य नीति

CHANAKYA NITI – चाणक्य नीति

चाणक्य नीति आचार्य चाणक्य द्वारा रचित एक अमर ग्रंथ है।इसमें मानव जीवन को सुखमय और ख़ुशहाल बनाने के लिए उपयोगी सुझाव दिए गए हैं। इस ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य मानवमात्र को जीवन के प्रत्येक पहलू की व्यावहारिक शिक्षा देना है।इस महान ग्रंथ में धर्म,संस्कृति,न्याय,शांति व सुरक्षा पर मानव जीवन की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है।इस महाग्रंथ में जीवन के सिद्धांत व जीवन व्यवहार पर आदर्श व यथार्थ का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।


परिचय – आचार्य चाणक्य स्वभाव से ही स्वाभिमानी,चरित्रवान,संयमी,तेज़ दिमाग़,इरादे के पक्के,प्रतिभा के धनी व युगद्रष्टा थे।।उनका जीवन हमेशा आत्मनिरीक्षण में मग्न रहता था। उन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच से,एक विस्तृत योजना बनाकर देश को एक सूत्र में बाँधने का असामान्य प्रयास किया।देश की एकता और अखण्डता को बचाते हुए उन्होंने अनेक त्याग किए।आचार्य ने अपने गुणवान व पराक्रमी शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य को मगध के सिंहासन पर स्थापित किया।उनके स्वार्थ त्याग,निर्भीकता,साहस व विद्वता के क़िस्से मगध साम्रराज्य में छा गए। चाणक्य का व्यक्तित्व शिक्षकों व राजनीतिज्ञों के लिये, किसी भी काल में,किसी भी देश में अनुकरणीय व आदर्श है।

चाणक्य नीति

चाणक्य नीति की अहम बातें – आचार्य ने जीवन को सफलतापूर्वक जीने के लिए कई सिद्धांत बनाए और उन्हें चाणक्य नीति में समाहित किया। चाणक्य ने मनुष्य की सफलता को लेकर चार ऐसी बातों का वर्णन किया,जिनका अनुसरण करने से मनुष्य सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकता है।चाणक्य के मुताबिक़ इंसान अगर ये बातें राज ही रखे तो अपनी कामयाबी के नए द्वार खोल सकता है। 1. जीवन के किसी भी मोड़ पर पैसों की कमी होने पर अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में किसी को नहीं बताना चाहिए।ऐसे समय ख़ुद पर यक़ीन कर आगे बढ़ना चाहिए। 2. अपने घर की बातें घर तक ही सीमित रखनी चाहिए।ऐसी बातें परिवार के सदस्यों के सम्मान व अपमान से जुड़ी होती हैं।बाहर के लोग आपस में क्लेश पैदा करते हैं। 3. जीवन में कई ऐसे मौक़े आते हैं जब हमें अपमान सहना पड़ता है।अपमानित होने पर हमें किसी व्यक्ति से चर्चा नहीं करनी चाहिए।लोगों को बताने पर आप मदद पाने की अपेक्षा मज़ाक़ के पात्र बन जातें हैं।इससे आपका मनोबल टूट जाता है। 4. अपने दुःख दर्द को दूसरों से साझा नहीं करना चाहिये।दूसरों के पास आपके दुःख दर्द को समझने का समय नहीं होता है।सिर्फ़ विश्वासी व्यक्तिओ पर भरोसा करना चाहिए।

चाणक्य नीति

विष्णुगुप्त व कौटिल्य के नाम से मशहूर आचार्य ने जीवन दर्शन के ऐसे सिद्धांत परिपादित किए की अगर इंसान उनमें आधे ही अपने जीवन में ढाल ले तो जीवन बड़ी आसानी से भव सागर पार हो जाएगा। चाणक्य नीति में जीवन शास्त्र के कुछ सिद्धांत …… 1. अधिक सीधा-साधा होना भी अच्छा नहीं है।सीधे पेड़ पहले काट लिए जाते हैं और टेढ़े-मेढ़े बच जाते हैं। 2. विपत्ति के समय मित्र की पहचान होती है। 3. जो धर्यवान नहीं है,उसका न वर्तमान है न भविष्य। 4. दुष्ट इंसान की मीठी बातों पर कभी भरोसा न करो।वो अपना मूल स्वभाव कभी नहीं छोड़ सकता।जैसे शेर कभी हिंसा नहीं छोड़ सकता है। 5. समाज में बदलाव क्यों नहीं आता क्योंकि ग़रीब में हिम्मत नहीं,मध्यम वर्ग को फ़ुर्सत नहीं और अमीर को ज़रूरत नहीं। 6. दूसरों की ग़लती से सीखें।अपने ही ऊपर प्रयोग करने से तुम्हारी उम्र कम पड़ जाएगी।7. मूर्खों से तारीफ़ सुनने से,बुद्धिमान से डाँट खाना ज्यादा बेहतर होता है। 8. जीवन में दो ही नियम रखने चाहिये,मित्र सुख में हो तो आमंत्रण के बिना नहीं जाना चाहिए और मित्र अगर दुःख में है तो आमंत्रण का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। 9. आपका ख़ुश रहना ही आपके दुश्मनो के लिए सबसे बड़ी सज़ा है। 10. झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केवल दूसरों के अहम् को बढ़ावा देता है

चाणक्य नीति

ऊपर लिखी पंक्तिया आचार्य चाणक्य का एक दर्शन मात्र है।उनके नीति शास्त्र में हज़ारों ऐसे वाक्य हैं जो आज भी जन सामान्य को झिंझोड़कर रख देते हैं।हज़ारों वर्ष पूर्व उनके कहे कथन आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।उनके देश,व्यक्ति व समाज के बारे में विचार जानने के लिए आपको चाणक्य नीति का अवश्य ही अध्ययन करना चाहिये। यह आपके जीवन को एक नयी दिशा प्रदान कर सकता है। धन्यवाद व जय हिंद

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